नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) ने अपनी विवादित अप्रकाशित पुस्तक को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कहा है कि फिलहाल वह केवल फिक्शन लिखने पर ध्यान दे रहे हैं। पुणे (Pune) में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि वह अब लघु कथाएं लिख रहे हैं और भविष्य में भी रचनात्मक लेखन जारी रखना चाहते हैं।
पूर्व आर्मी चीफ की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny को लेकर हाल में विवाद बढ़ा है। बताया जा रहा है कि इस पुस्तक में चीन सीमा से जुड़े एक घटनाक्रम का जिक्र है। सरकार की ओर से अब तक इसे प्रकाशित करने की मंजूरी नहीं दी गई है, हालांकि इसके कुछ अंश सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई थीं।
पुणे में बातचीत के दौरान नरवणे ने कहा कि वह पहले भी समय-समय पर लिखते रहे हैं। उन्होंने बताया कि सैन्य रिपोर्ट्स के अलावा उन्होंने विभिन्न अकादमिक जर्नल्स के लिए लेख लिखे हैं और कुछ लघु कथाएं भी लिखी हैं, जिनमें से एक पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान पूरी तरह फिक्शन लेखन पर है।
इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में किताब के कुछ कथित अंशों का हवाला देने की कोशिश की थी और सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए थे। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि अप्रकाशित किताब का संसद में उल्लेख नहीं किया जा सकता।
बताया जा रहा है कि यह पुस्तक 2023 से रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है। विवाद के बावजूद नरवणे ने पुस्तक से जुड़े सवालों पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया और अपने लेखन के नए रुख—फिक्शन—पर ही जोर दिया।
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