
वॉशिंगटन. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों (Energy Facilities ) पर हमले (Attacks) की तय समय सीमा को बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 तक कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
ईरान के अनुरोध पर लिया गया फैसला- ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और बातचीत काफी अच्छी चल रही है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि मीडिया में जो नकारात्मक खबरें आ रही हैं, वे गलत हैं और असल में बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। पहले उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों के लिए खोले, नहीं तो कड़े हमले होंगे। लेकिन अब यह डेडलाइन दो बार बढ़ाई जा चुकी है, जिससे साफ है कि अमेरिका अभी सैन्य कार्रवाई से पहले बातचीत को मौका देना चाहता है।
अमेरिका से बातचीत में ईरान ने रखी अपनी शर्तें
दूसरी तरफ, ईरान ने भी बातचीत में अपनी शर्तें रख दी हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, उसने अमेरिका से कहा है कि पहले अमेरिका और इस्राइल उसके ऊपर और उसके सहयोगी संगठनों पर हो रहे हमले बंद करें। इसके अलावा ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग भी रखी है। ये शर्तें काफी सख्त मानी जा रही हैं और अमेरिका के प्रस्ताव से काफी आगे हैं।
बातचीत के बीच ट्रंप का कड़ा रुख बरकरार
इस बीच, अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि ईरान के साथ बातचीत के लिए 15 बिंदुओं की एक योजना पाकिस्तान के जरिए भेजी गई है और कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। हालांकि अभी दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है। ट्रंप ने एक तरफ बातचीत की बात की, वहीं दूसरी तरफ कड़ा रुख भी दिखाया। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण कर सकता है, जैसा उसने पहले वेनेजुएला में किया था। इससे साफ है कि अमेरिका दबाव की रणनीति भी साथ-साथ चला रहा है।
उधर, इस्राइल के अंदर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया कि सेना पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है और बिना सही रणनीति के कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सेना के पास पर्याप्त सैनिक नहीं हैं और हालात खतरनाक हो सकते हैं।
ईरान में अभी कैसे हैं हालात?
जमीन पर हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान पर लगातार हवाई हमले हो रहे हैं, जिसमें उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक बड़े नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के मारे जाने की खबर है। इसके अलावा ईरान के कई शहरों में धमाके और हमले जारी हैं। वहीं, ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे क्षेत्र में डर और अस्थिरता बढ़ गई है।
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