
नई दिल्ली । फिल्मों की दुनिया में कई बार किसी छोटी-सी घटना से ऐसी बड़ी कहानी जन्म ले लेती है, जिसकी कल्पना शायद पहले किसी ने नहीं की होती। बॉलीवुड (Bollywood) की कल्ट फिल्मों में गिनी जाने वाली फिल्म मिस्टर इंडिया (Mr India movie) का आइडिया भी कुछ इसी तरह एक अनोखे किस्से से पैदा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म की कहानी का बीज उस समय पड़ा जब महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अपनी ही एक फिल्म के मुहूर्त शॉट (Muhurat shot) के लिए समय पर नहीं पहुंच पाए थे। उस छोटी-सी घटना ने लेखक जावेद अख्तर(Javed Akhtar) के दिमाग में ऐसी कल्पना जगाई, जिसने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को उसकी पहली लोकप्रिय साइंस-फिक्शन सुपरहीरो फिल्मों में से एक दे दी।
कहानी की शुरुआत एक फिल्म के मुहूर्त समारोह से हुई थी। उस दिन अमिताभ बच्चन को फिल्म की लीड एक्ट्रेस के साथ पहला शॉट देना था, लेकिन किसी कारणवश वे तय समय पर सेट पर नहीं पहुंच सके। मुहूर्त का समय निकल रहा था और पूरी यूनिट इंतजार कर रही थी। ऐसे में टीम ने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने तय किया कि शॉट लिया जाएगा, लेकिन हीरो की जगह केवल उनकी आवाज का इस्तेमाल किया जाएगा। एक ऑडियो टेप चलाया गया और कैमरे को इस तरह घुमाया गया कि दर्शकों को ऐसा लगे जैसे हीरो वहीं मौजूद हो, जबकि असल में वह नजर नहीं आ रहा था।
उस समय वहां मौजूद जावेद अख्तर के लिए यह दृश्य किसी प्रेरणा से कम नहीं था। उनके मन में तुरंत एक विचार आया—क्या हो अगर कोई ऐसी कहानी लिखी जाए जिसमें हीरो सचमुच दिखाई ही न दे और सिर्फ उसकी मौजूदगी का एहसास हो? इसी सोच से एक ऐसे किरदार का जन्म हुआ जो लोगों की मदद करता है, लेकिन दिखाई नहीं देता। यही कल्पना आगे चलकर ‘मिस्टर इंडिया’ की कहानी की नींव बनी।
बाद में निर्देशक शेखर कपूर ने इस कहानी को बड़े पर्दे पर उतारने का जिम्मा संभाला। फिल्म के लिए कई अभिनेताओं के नामों पर विचार हुआ, लेकिन अंततः यह किरदार अनिल कपूर को मिला और उन्होंने इसे यादगार बना दिया। फिल्म में श्रीदेवी की चुलबुली अदाकारी और उनका मशहूर गीत हवा हवाई दर्शकों के दिलों में बस गया। वहीं खलनायक मोगैम्बो के रूप में अमरीश पुरी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उनका संवाद “मोगैम्बो खुश हुआ” आज भी फिल्म इतिहास के सबसे लोकप्रिय डायलॉग्स में गिना जाता है।
साल 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म को उस दौर की सबसे महंगी फिल्मों में से एक माना जाता है। करीब 3.8 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म पर इतना पैसा लगाना उस समय एक बड़ा जोखिम था। हालांकि रिलीज के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की और लगभग 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर डाली।
‘मिस्टर इंडिया’ केवल अपनी कमाई की वजह से ही नहीं, बल्कि अपने खास स्पेशल इफेक्ट्स, मनोरंजक कहानी और यादगार संगीत के कारण भी दर्शकों के दिलों में जगह बना चुकी है। आज भी जब हिंदी सिनेमा की बेहतरीन और आइकॉनिक फिल्मों की बात होती है, तो ‘मिस्टर इंडिया’ का नाम जरूर लिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म का आइडिया एक साधारण-सी घटना से जन्मा था, वही आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved