
सिहोरा। शारदा बीट के जंगलों से निकलकर सिहोरा नगर पालिका के रिहायशी इलाकों (वार्ड-1, वार्ड-16, 17 और 18) में तेंदुए की धमक को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन वन विभाग का रेस्क्यू अमला अब तक तेंदुए को पकडऩे में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। तेंदुए की लगातार आवाजाही से पूरा क्षेत्र दहशत के साए में जीने को मजबूर है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब मीडिया और जनता को जवाब देने से साफ बच रहे हैं। अधिकारी फोन उठाने से कतरा रहे हैं या फिर जांच और गश्त चल रही है का रटा-रटाया मुहावरा बोलकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
सुस्त तंत्र और नवागत कलेक्टर को चुनौती
इस प्रशासनिक लापरवाही के बीच, जबलपुर जिले में नवागत कलेक्टर साहब ने कमान संभाली है। जिले के नए मुखिया के आगमन पर जहां एक तरफ विकास और मुस्तैदी की उम्मीदें हैं, वहीं सिहोरा वन विभाग का यह ढर्रा एक बड़ा दाग साबित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है और लोग अब तीखे सवाल उठा रहे हैं कि क्या वन विभाग सिहोरा में किसी बड़ी अनहोनी या खूनी हादसे के साथ नवागत कलेक्टर साहब का स्वागत करने की तैयारी में है? आखिर क्यों एक तेंदुए को काबू करने में पूरा महकमा असहाय नजर आ रहा है?
अवैध कटाई का खामियाजा भुगत रही जनता
मूल खबर के मुताबिक, शारदा बीट के जंगलों में धड़ल्ले से हो रही अवैध कटाई और खनन ने वन्यजीवों के आशियाने उजाड़ दिए हैं। यही वजह है कि बेघर हो चुके हिंसक वन्यजीव अब इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। वन विभाग न तो जंगलों को बचा पा रहा है और न ही रिहायशी इलाकों में रहने वाले मासूम नागरिकों और पालतू मवेशियों की सुरक्षा तय कर पा रहा है।
जनता का सब्र टूटा, आंदोलन की सुगबुगाहट
दिन ढलते ही सिहोरा के कई वार्डों में सन्नाटा पसर जाता है। बच्चों का खेलना और बड़ों का घरों से निकलना दूभर हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग के आला अधिकारियों ने अपनी रहस्यमयी चुप्पी नहीं तोड़ी और तेंदुए को जल्द से जल्द सुरक्षित रेस्क्यू नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि नवागत कलेक्टर साहब इस लापरवाह तंत्र पर क्या एक्शन लेते हैं।
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