
नई दिल्ली । अभिनेता सनी देओल (Sunny Deol) ने अपने जीवन से जुड़े एक ऐसे सपने के बारे में बताया है, जिसे वह कभी पूरा करना चाहते थे। सनी देओल को ड्राइविंग (Driving) और रेसिंग (Racing) का काफी शौक था और उनकी इच्छा प्रोफेशनल फॉर्मूला वन रेसिंग ड्राइवर (Formula One Racing Driver) बनने की थी। हालांकि, पिता धर्मेंद्र (Dharmendra) के बेहद सुरक्षात्मक रवैये के कारण उनका यह सपना आगे नहीं बढ़ सका।
सनी देओल ने यह खुलासा अमिताभ बच्चन के सामने किया। वह अपनी फिल्म बंटवारा 1947 के प्रचार के सिलसिले में कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ आमिर खान और प्रीति जिंटा भी मौजूद थे। बातचीत के बीच अमिताभ बच्चन ने सनी से उनके रेसिंग में रुचि होने और फॉर्मूला वन ड्राइवर बनने की इच्छा के बारे में सवाल किया।
जवाब में सनी देओल ने बताया कि उन्हें ड्राइविंग का बहुत शौक था। वह रेसिंग को लेकर भी काफी उत्साहित रहते थे और इसे पेशेवर स्तर तक ले जाना चाहते थे। लेकिन उनके पिता धर्मेंद्र बच्चों को लेकर काफी प्रोटेक्टिव थे। वह ऐसे खेलों और गतिविधियों की अनुमति नहीं देते थे, जिनमें चोट या जान का जोखिम अधिक हो सकता था।
सनी ने बताया कि घर में उस समय खेल या अन्य जोखिम भरी गतिविधियों को लेकर पिता की अनुमति आसानी से नहीं मिलती थी। धर्मेंद्र का यह रवैया अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता से जुड़ा था। इसी वजह से सनी का रेसिंग का सपना बीच में ही रह गया और वह पेशेवर रेसिंग की दुनिया में कदम नहीं रख सके।
फॉर्मूला वन रेसिंग का सपना पूरा नहीं होने के बावजूद सनी देओल ने अभिनय की दुनिया में लंबी और सफल पारी खेली। उन्होंने वर्ष 1983 में बेताब से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने अर्जुन, त्रिदेव, घायल, दामिनी, बॉर्डर, जिद्दी और इंडियन जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी दमदार आवाज, एक्शन शैली और संवाद अदायगी ने उन्हें हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय सितारों में शामिल किया।
सनी देओल की फिल्म दामिनी का तारीख पे तारीख संवाद विशेष रूप से चर्चित हुआ। यह संवाद आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है और अदालत से जुड़े संदर्भों में अक्सर सुनने को मिलता है। अपने लंबे करियर में सनी ने एक्शन के साथ-साथ गंभीर और भावनात्मक भूमिकाएं भी निभाई हैं।
इन दिनों सनी देओल अपनी फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा, करण देओल, शबाना आजमी और अली फजल जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और इसका विषय देश के विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि से जुड़ा है।
बंटवारा 1947 की रिलीज के साथ इमरान हाशमी की आवारापन 2 भी सिनेमाघरों में पहुंची है। दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर सीधा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक आवारापन 2 ने पहले दिन करीब 22 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि बंटवारा 1947 का पहले दिन का कारोबार लगभग 6.84 करोड़ रुपये रहा।
सनी देओल का रेसिंग ड्राइवर बनने का सपना भले ही पूरा नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई। धर्मेंद्र की तरह उन्होंने भी कई दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया और अपने अभिनय तथा एक्शन भूमिकाओं के जरिए हिंदी सिनेमा में मजबूत जगह बनाई। पिता की सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण छूटा उनका यह सपना आज उनके प्रशंसकों के लिए उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाता है।
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