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क्या स्मार्टफोन ने खत्म कर दिया इश्क का इंतजार जावेद अख्तर की दलील ने छेड़ी बहस

March 23, 2026

नई दिल्ली । फिल्मों में कभी जो रोमांस दिलों को छू जाता(Romance touches the heart.) था आज वही एहसास धीरे धीरे फीका पड़ता नजर आ रहा है। पुराने दौर की फिल्मों में इंतजार तड़प और अधूरी ख्वाहिशों (Unfulfilled Desires) का जो जादू था वह अब कम होता दिख रहा है। इस बदलते ट्रेंड (Changing Trends) पर दिग्गज लेखक (Veteran Writer) और गीतकार जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने एक बेहद दिलचस्प और तार्किक वजह सामने रखी है जो आज की पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर देती है।

एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी खासकर स्मार्टफोन्स ने रोमांस की बुनियाद को ही बदल दिया है। उनके मुताबिक असली रोमांस पाने में नहीं बल्कि पाने की उम्मीद में होता है। यानी जो इंतजार होता था वही प्यार को खास बनाता था। आज के दौर में सब कुछ तुरंत उपलब्ध है और यही वजह है कि उस इंतजार का रोमांच खत्म हो गया है।

उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए रोमियो और जूलिएट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस दौर में दोनों के पास स्मार्टफोन होते तो क्या रोमियो ठंडी रात में जूलिएट की बालकनी के नीचे खड़ा होकर उसका इंतजार करता। शायद नहीं क्योंकि वह एक कॉल या मैसेज में बात कर सकता था। यही फर्क आज के और पुराने रोमांस में सबसे बड़ा बदलाव बनकर सामने आया है।

जावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले दूरी ही आकर्षण पैदा करती थी। जब किसी को देखने मिलने या समझने के लिए वक्त लगता था तो कल्पनाएं जन्म लेती थीं। वही कल्पनाएं एक आम इंसान को भी खास बना देती थीं। लेकिन आज सब कुछ तुरंत सामने आ जाता है। न इंतजार है न कल्पना की जरूरत। इसी कारण रोमांस का वह जादू जो धीरे धीरे बनता था अब गायब होता जा रहा है।

इस चर्चा के दौरान आमिर खान भी उनकी बात से सहमत नजर आए। यह साफ दिखा कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। आज की फिल्मों में तेजी है लेकिन भावनाओं की गहराई कहीं न कहीं कम होती जा रही है।

 

  • वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि इन प्रोजेक्ट्स को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है लेकिन दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनी हुई है।

    कुल मिलाकर जावेद अख्तर की यह बात सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी लागू होती है। टेक्नोलॉजी ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं उसने रिश्तों के उस एहसास को भी बदल दिया है जिसमें इंतजार और कल्पना की सबसे बड़ी भूमिका हुआ करती थी।

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