
नई दिल्ली । जापान (Japan)में होने वाले एशियन गेम्स 2026 (2026 Asian Games)में भारतीय एथलीट (Indian athlete)सिर्फ मैदान पर मेडल जीतने की तैयारी नहीं कर रहे हैं बल्कि उन्हें प्रतियोगिता(Indian athlete) स्थल पर मिलने वाली रहने की अलग व्यवस्था के लिए भी पहले से तैयार किया जा रहा है। इस बार आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह है कि खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। खिलाड़ियों को कंटेनर क्रूज और दूसरी जगहों पर ठहराने की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में भारतीय खिलाड़ियों को अचानक नए और सीमित माहौल का सामना न करना पड़े इसके लिए Sports Authority of India यानी SAI ने देश में ही एक अनोखी तैयारी शुरू कर दी है।
पटियाला और बेंगलुरु में कंटेनर आधारित कमरे तैयार किए गए हैं जहां भारतीय एथलीट बारी बारी से रात गुजार रहे हैं। पहली नजर में यह व्यवस्था थोड़ी हैरान करने वाली लग सकती है क्योंकि कंटेनर में जगह सीमित होती है और खिलाड़ी आमतौर पर ट्रेनिंग के साथ आराम और रिकवरी के लिए पर्याप्त जगह के आदी होते हैं। लेकिन इस पहल का मकसद खिलाड़ियों को किसी असुविधा में डालना नहीं बल्कि उन्हें उस माहौल से पहले ही परिचित कराना है जिसका सामना उन्हें जापान पहुंचने के बाद करना पड़ सकता है।
SAI अधिकारियों के मुताबिक करीब दो साल पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि एशियन गेम्स के दौरान खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक एथलीट्स विलेज की व्यवस्था नहीं होगी। इसके बाद योजना बनाई गई कि भारतीय खिलाड़ियों को भारत में ही वैसा माहौल देकर मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया जाए। कोशिश यह है कि जापान पहुंचने पर कम जगह या अलग तरह की रहने की व्यवस्था खिलाड़ियों के प्रदर्शन और एकाग्रता पर असर न डाले।
पटियाला में तैयार किया गया कंटेनर करीब 13 मीटर लंबा और लगभग तीन मीटर चौड़ा है। सीमित जगह का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए इसमें खिलाड़ियों की जरूरत के मुताबिक कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसके दोनों सिरों पर ट्विन शेयरिंग बेडरूम बनाए गए हैं जबकि बीच में एक संकरी गैलरी है। कंटेनर में एयर कंडीशनिंग के साथ छोटी लॉन्ड्री एरिया वॉशिंग मशीन फ्रिज और सिंक वाली कॉम्पैक्ट किचन जैसी सुविधाएं भी हैं। बाथरूम में वॉश बेसिन टॉयलेट और शॉवर के लिए अलग हिस्से बनाए गए हैं। खिलाड़ियों का सामान रखने के लिए कैबिनेट और भारी किट बैग के लिए बेड के नीचे जगह भी बनाई गई है।
दो बार के एशियन गेम्स चैंपियन शॉटपुटर तजिंदरपाल सिंह तूर ने भी इस अनुभव को उपयोगी बताया। करीब 6 फीट 4 इंच लंबे तजिंदर के लिए सीमित जगह में रहना सामान्य अनुभव से अलग था लेकिन उन्होंने माना कि अंदर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनका मानना है कि अगर खिलाड़ी पहली बार जापान पहुंचकर ऐसी जगह देखते तो शुरुआती समय उस माहौल को समझने और उसके साथ तालमेल बैठाने में निकल सकता था। भारत में पहले से अनुभव मिलने से यह परेशानी काफी कम हो सकती है।
डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरामणा ने भी कंटेनर में दो रातें बिताईं। थ्रो इवेंट के खिलाड़ियों के लिए जगह की जरूरत कुछ ज्यादा होती है इसलिए शुरुआत में उन्हें भी थोड़ी परेशानी महसूस हुई। हालांकि दूसरे दिन तक उन्होंने इस वातावरण के साथ तालमेल बैठा लिया। यही इस पूरी पहल का उद्देश्य भी है कि खिलाड़ी छोटी से छोटी असुविधा के साथ जल्दी से जल्दी एडजस्ट करना सीखें।
दिलचस्प बात यह है कि इन कंटेनरों को विशेष रूप से खरीदकर तैयार नहीं किया गया है। कोविड महामारी के दौरान NSNIS पटियाला में इनका इस्तेमाल वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स के उपकरण रखने के लिए किया जाता था। अब इन्हीं पुराने कंटेनरों को एशियन गेम्स की तैयारी के लिए आवासीय सिमुलेटर में बदल दिया गया है। प्रतियोगिता के बाद भी इनका इस्तेमाल जारी रहेगा और इन्हें गेस्ट हाउस में तब्दील करने की योजना है।
28 अगस्त से शुरू हुई इस कवायद में अब तक करीब आठ खिलाड़ी कंटेनर में रात गुजार चुके हैं और आगे भी तय कार्यक्रम के अनुसार अन्य एथलीट यहां रुकेंगे। असल में यह तैयारी सिर्फ रहने की जगह को लेकर नहीं बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती से जुड़ी है। भारतीय एथलीट जब जापान में मैदान पर उतरें तो उनके सामने कमरे की जगह उसकी सीमाएं या सुविधाएं नहीं बल्कि सिर्फ मेडल का लक्ष्य होना चाहिए। इसी सोच के साथ SAI ने पटियाला में एक छोटा सा जापान पहले ही तैयार कर दिया है।
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