नई दिल्ली। योग गुरु बाबा रामदेव (Yoga Guru Baba Ramdev) ने देश की व्यवस्था में बदलाव को लेकर कहा है कि इसे किसी एक राजनीतिक दल, विपक्षी समूह या व्यक्ति के प्रयास से नहीं बदला जा सकता। उन्होंने इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक जागरूकता को जरूरी बताया। छत्तीसगढ़ के रायपुर (Raipur, Chhattisgarh) में उन्होंने आंदोलनों के स्वरूप पर भी अपनी राय रखी और विरोध प्रदर्शनों में छोटे बच्चों को शामिल किए जाने का विरोध किया।
रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए होने वाले आंदोलन संवैधानिक, लोकतांत्रिक, नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित होने चाहिए। हालांकि, विरोध के नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है और बच्चों को ऐसे प्रदर्शनों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
रामदेव ने कहा कि देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, ब्राह्मण, क्षत्रिय, आदिवासी या SC-ST समुदाय खतरे में नहीं हैं। उनके मुताबिक, असली चिंता देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर है। उन्होंने देश की प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता, अखंडता और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विरोध प्रदर्शनों में बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रामदेव ने कहा कि छोटे बच्चों को प्रदर्शन में आगे करना उचित नहीं है और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इस तरह की प्रवृत्ति को सही नहीं माना जाता।
योग गुरु ने कहा कि देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर दिशा में ले जाने की जरूरत है। उन्होंने माना कि इन क्षेत्रों को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं, जिनका समाधान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को दूर करने में सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।
रामदेव के मुताबिक, देश की पूरी व्यवस्था में बदलाव के लिए केवल राजनीतिक प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक—तीनों स्तरों पर जागरूकता पैदा करनी होगी।
बाबा रामदेव ने इससे पहले शनिवार को देश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नौकरियों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि कई जगह बच्चे शिकायत कर रहे हैं कि स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी की भी शिकायतें सामने आती हैं।
उन्होंने परीक्षा में नकल और प्रश्नपत्र लीक होने का मुद्दा उठाते हुए सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होता है और जाति तथा धर्म के आधार पर चयन किया जाता है।
रामदेव ने कहा कि एक ओर देश में ‘सत्यमेव जयते’ और ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ जैसे आदर्शों की बात होती है, वहीं दूसरी ओर भर्ती में भारी रिश्वत लिए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हर व्यक्ति विरोध के लिए सड़कों पर उतरने लगेगा तो देश की व्यवस्था कैसे चलेगी।
उन्होंने सरकार से शिक्षा, रोजगार और भर्ती व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं को दूर नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज हो सकते हैं। हालांकि, अपने ताजा बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मूल्यों पर आधारित होना चाहिए, न कि अराजकता फैलाने वाला।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved