
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार को एक महीने पूरे हो गए। इस एक महीने के अंदर बंगाल में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। शुरुआती 30 दिनों में ही प्रशासन ने कई वैचारिक और कल्याणकारी कदम उठाए, जिनमें स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करना, सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाना, BSF को 142 एकड़ जमीन देना और टाटा ग्रुप की वापसी जैसे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना शामिल है।
इस बदलाव के बीच, सत्ताधारी पार्टी की सालगिरह के समय ही पार्टी के अंदर जबरदस्त उछाल आया है। कई टीएमसी नेता बीजेपी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वहीं, दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 बागी सांसद केंद्रीय NDA के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार का एक महीना पूरा होने पर शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को मेदिनीपुर में प्रशासनिक समीक्षा बैठक की। बैठक में टीएमसी सांसद जून मालिया, विधायक सुइली साहा और संसद दीपक अधिकारी भी शामिल हुए। सीएम ने जिले की कानून-व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण, सड़क व स्वास्थ्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
जून मालिया ने मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और जलजमाव की समस्या उठाई। सुइली साहा ने ग्रामीण इलाकों में पेयजल और 100 दिन के काम में तेजी लाने की मांग रखी। देव अधिकारी ने युवाओं के लिए रोजगार और स्टार्टअप योजना पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने सभी विभागों को 15 दिन में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, ‘मेदिनीपुर की संस्कृति और विकास दोनों सरकार की प्राथमिकता है।’ बैठक में डीएम, एसपी समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बता दें कि शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। यह पहली बार है, जब भाजपा का कोई नेता पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बना। शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित हुआ था। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी 2021 से 2026 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे थे।
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