
पटना। पटना (Patna) की सीबीआई (CBI) टीम ने एक दर्जन ठिकानों पर छापेमारी कर रेलवे परियोजना (Railway project) में घूसखोरी के बड़े नेटवर्क (Large Network Bribery) का गुरुवार को भंडाफोड़ किया है। इस मामले में निजी कंपनी एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) अनूप सिंह, सहायक महाप्रबंधक गौरव कुशवाहा, अकाउंटेंट आकाश पात्रा और धीरज विरमानी को गिरफ्तार किया है। वहीं, पूर्व मध्य रेलवे निर्माण विभाग से जुड़े मुख्य अभियंता अनिल कुमार सहित 11 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। छापेमारी के दौरान 45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
गिरफ्तार चारों अभियुक्तों को देर शाम पटना की सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से विशेष न्यायाधीश ने 7 दिनों की रिमांड दे दी। रिमांड के दौरान सीबीआई आरोपियों से पूछताछ करेगी। केस के जांच की जिम्मेदारी सीबीआई पटना की डीएसपी रूबी चौधरी को मिली है। सीबीआई ने रिश्वत कांड में पटना के महेंद्रूघाट स्थित पूर्व मध्य रेलवे निर्माण कार्यालय और डेहरी ऑन सोन सहित एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की।
बिल भुगतान के लिए रिश्वत दी:
आरोप है कि गिरफ्तार अभियुक्तों ने निर्माण कार्यों का बिल भुगतान स्वीकृत करने की एवज में रेलवे अधिकारियों को लाखों रुपये की रिश्वत दी। सीबीआई रेल परियोजना में गड़बड़ी और रिश्वत की जांच लंबे समय से कर रही है। जांच एजेंसी को जानकारी मिली थी कि रेलवे निर्माण भवन में अधिकारियों और निर्माण कंपनियों के बीच लेन-देन का खेल चल रहा है। इस पर सक्रिय हुई सीबीआई की एक टीम महेंद्रूघाट स्थित रेलवे कार्यालय में बुधवार से ही डट गई। टीम ने एचजी इंफ्रा के एमडी अनूप सिंह को उनके सहयोगियों समेत घूस की राशि के साथ दबोच लिया।
रडार पर कई अफसर:
छापेमारी के बाद मुख्य अभियंता सहित विभाग के कई पदाधिकारी-कर्मियों से पूछताछ की गई। मामले में निर्माण विभाग से जुड़े कई और पदाधिकारी-कर्मी भी सीबीआई के निशाने पर हैं। रिमांड के दौरान सीबीआई मुख्य अभियंता और निजी कंपनी के अफसरों को आमने-सामने बिठा कर पूछताछ कर सकती है। पूछताछ में घूसखोरी के नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी आएंगे। जांच एजेंसी इस केस से जुड़े पुराने दस्तावेज भी खोलने की तैयारी में जुटी है। इससे जमीन पर हुए काम और उसकी एवज में पास कराए गए बिल की वास्तविक जानकारी मिल सकेगी।
एचजी इंफ्रा कंपनी को गया जी से डेहरी तक ट्रैक का ठेका
एचजी इंफ्रा को गया जी से डेहरी ऑन सोन तक पटरी के नीचे गिट्टी आदि बिछाने का काम मिला हुआ है। कंपनी के अधिकारियों ने काम से जुड़ा बिल पास कराने के लिए घूसखोरी का बड़ा नेटवर्क बना रखा था। इसके लिए मुख्य अभियंता से लेकर नीचे तक कमीशन की राशि तय कर रखी गई थी। कमीशन के इस खेल की जानकारी सीबीआई को मिली। इसके बाद सीबीआई की टीम ने पहले मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान मामला सत्य पाये जाने पर अलग-अलग टीम बना कर डेहरी ऑन सोन से लेकर राजधानी पटना तक छापेमारी की गई। महेंद्रूघाट रेलवे परिसर में छापेमारी के दौरान परियोजना से जुड़े पुराने कागजात एवं बिलों की भी जांच की गई। इस दौरान काफी अनियमितता पाई गई।
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