रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित बिलासपुर नसबंदी कांड (Bilaspur sterilization scandal) में करीब 11 साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आर.के. गुप्ता (Gupta) को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दो साल की सजा और जुर्माना लगाया है।
2014 के नसबंदी कैंप से जुड़ा मामला
यह मामला 8 नवंबर 2014 का है, जब बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के पेंडारी स्थित एक अस्पताल में नसबंदी शिविर लगाया गया था। इस कैंप में 83 महिलाओं की सर्जरी की गई थी।
सर्जरी के बाद उसी दिन महिलाओं को घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में 50 से अधिक महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। बाद में इनमें से 12 महिलाओं की मौत हो गई।
जल्दबाजी और लापरवाही बनी वजह
अभियोजन पक्ष के अनुसार, डॉ. गुप्ता ने एक बंद पड़े निजी अस्पताल में महज छह घंटे के भीतर 80 से ज्यादा महिलाओं की नसबंदी कर दी थी।
जांच में सामने आया कि:
चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया गया
घटिया और दूषित दवाओं का इस्तेमाल हुआ
सर्जरी के बाद उचित देखभाल नहीं दी गई
मौतों की वजह सेप्टीसीमिया (खून में संक्रमण) बताई गई, जो कथित लापरवाही और दूषित दवाओं के कारण हुआ।
जमानत भी मिली
चूंकि डॉ. गुप्ता को सुनाई गई सजा तीन साल से कम है, इसलिए अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें जमानत भी दे दी है।
लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। यह मामला सिस्टम की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े करता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved