
नई दिल्ली। लोकसभा में पास होने के बाद आज (गुरुवार को) राज्यसभा में परीक्षा में सुधार वाला Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश किया गया। इसपर चर्चा के दौरान करते हुए सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए यह बिल लाया गया है। खड़गे ने ये भी अपील की कि सरकार को विपक्ष की सुननी चाहिए। साथ ही, मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में PM मोदी के बयान की भी मांग की।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “पेपर लीक के कारण बहुत से बेगुनाह लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। इस नए बिल से कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि पुराने कानून में बस कुछ डेटा ही बदला गया है। भारी-भरकम जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान तो किए गए हैं, लेकिन इससे कुछ नहीं बदलेगा।”
खड़गे ने ये भी कहा कि ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल’ सड़कों पर उतरे युवाओं को शांत करने के लिए लाया गया है, न कि पेपर लीक की समस्या को हल करने के लिए। इसमें कुछ भी नया नहीं है। जब आंदोलन चल रहा तो सरकार ने संवाद क्यों नहीं किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे बोले कि राहुल गांधी 2024 से यह मुद्दा उठा रहे हैं। विपक्ष ने छात्रों के मुद्दों को उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आकर बयान देना चाहिए। मैं सवाल पूछता हूं कि लाठी-डंडे और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया। छात्रों को रोकने के लिए सरकार ने मेट्रो स्टेशन को बंद किया। बिहार में AK-47 का इस्तेमाल हुआ।
खड़गे ने आगे कहा कि छात्र तो संवाद चाहते थे लेकिन उन्हें लाठी मिली। गृहमंत्री को इस मुद्दे पर खुलकर बोलना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीके के बाद धर्मेंद्र प्रधान के संसद में स्वागत को लेकर भी सवाल पूछा और कहा कि इसकी क्या जरूरत थी। खड़गे के संबोधन से पहले, नीट प्रदर्शन को लेकर राज्यसभा में जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस हो गई थी। तब केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।
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