
नई दिल्ली ।अभिनेता सैफ अली खान (Saif Ali Khan) ने जनवरी 2025 में घर के भीतर हुए चाकू हमले (Knife Attack) के बाद अपने अनुभव को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि घटना के काफी समय बाद भी वह पूरी तरह उससे उबर नहीं पाए हैं। खास तौर पर चाकू (Knife) सामने आने पर उनकी प्रतिक्रिया अचानक बदल जाती है। सैफ ने यह भी बताया कि हमले के दौरान उनकी स्थिति बेहद गंभीर (Extremely serious)थी और उनकी स्पाइनल कॉर्ड (Spinal Cord) बाल-बाल बची थी।
सैफ के मुताबिक, इस घटना से उनके परिवार पर भी गहरा असर पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस पूरे अनुभव से सबसे ज्यादा प्रभावित उनकी पत्नी करीना कपूर खान हुईं। सैफ ने बताया कि परिवार ने स्थिति का सामना अच्छी तरह किया, लेकिन वह खुद भी अभी पूरी तरह इससे बाहर नहीं निकल पाए हैं।
अभिनेता ने बताया कि अगर आज भी उनके सामने चाकू आ जाए तो वह अचानक प्रतिक्रिया देते हैं। उनके मुताबिक, यह घटना उनके जेहन में अब भी मौजूद है। हमले के दौरान उन्हें शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई थीं और वह गंभीर नुकसान से बच गए।
सैफ ने अपनी किस्मत को भी इस घटना से जोड़ते हुए बताया कि चाकू टूट गया था। उनका कहना था कि अगर हमलावर के पास ज्यादा मजबूत चाकू होता तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने कहा कि उन्हें कई जगह कट लगे, लेकिन वह बच गए और इसे वह अपनी अच्छी किस्मत मानते हैं।
हमले के बावजूद सैफ ने हमलावर के प्रति अपने नजरिये को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह उसे माफ कर सकते हैं। अभिनेता ने घटना को सामाजिक असमानता से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को पैसों की बहुत जरूरत हो सकती है और संभव है कि उसे उस समय यह पता ही न रहा हो कि वह कहां है और क्या कर रहा है।
सैफ ने यह भी कहा कि हमलावर के लिए स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण रही। उन्होंने उसके प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि संभव है कि उसे भी काफी समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो। अभिनेता ने इस दौरान अपने स्वास्थ्य पर पड़े गंभीर असर का भी जिक्र किया।
सैफ ने बताया कि हमले के बाद कुछ समय तक उन्हें अपने पैरों का एहसास नहीं हो रहा था। उनकी स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचने की आशंका थी, लेकिन वह कटी नहीं थी। उन्होंने इस स्थिति को बेहद गंभीर अनुभव के तौर पर याद किया।
इस घटना ने सैफ के जीवन को देखने के नजरिये को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि उनके मन में यह बात रह गई कि उन्हें अपने परिवार और दोस्तों के लिए अधिक उपलब्ध रहना चाहिए। अस्पताल के बिस्तर पर रहते हुए भी वह अपने दोस्तों के साथ समय बिताने और सामान्य जीवन के छोटे-छोटे पलों को दोबारा महसूस करने के बारे में सोच रहे थे।
सैफ ने यह भी बताया कि उस समय उनके मन में जिंदगी और मौत को लेकर कई विचार आए। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिंदगी का आनंद लेना चाहते थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए एक योद्धा की मौत बेहतर होती और वह लकवाग्रस्त होकर पड़े रहने के बजाय मरना पसंद करते।
हमले के बाद सैफ के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि घटना का असर केवल उस समय की चोटों तक सीमित नहीं रहा। चाकू देखकर उनकी तत्काल प्रतिक्रिया और परिवार के साथ अधिक समय बिताने की इच्छा बताती है कि उस घटना ने उनके निजी जीवन और सोच पर भी प्रभाव डाला है।
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