नई दिल्ली। एक ओर दुनिया ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ते तनाव पर नजरें टिकाए हुए है, वहीं दूसरी ओर चीन ने सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। चीन ने पाकिस्तान (China and Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान की सीमा से सटे अपने शिनजियांग क्षेत्र में एक नई प्रशासनिक इकाई (काउंटी) स्थापित कर दी है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण फिर गरमा गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “सेनलिंग” नाम की यह नई काउंटी काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और PoK के बेहद करीब मानी जा रही है। इस कदम को चीन की सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण के संदर्भ में।
चीन इससे पहले भी शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” नाम की दो नई काउंटियों का गठन कर चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लगातार प्रशासनिक ढांचा मजबूत करना चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
भारत पहले ही इन कदमों का विरोध कर चुका है। भारत का साफ कहना है कि इन नई काउंटियों के कुछ हिस्से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आते हैं। खास तौर पर अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराई है और ऐसे किसी भी बदलाव को अस्वीकार्य बताया है।
जानकारी के अनुसार, सेनलिंग काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा। काशगर ऐतिहासिक रूप से पुराने सिल्क रूट का अहम केंद्र रहा है और यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) की शुरुआत का भी प्रमुख बिंदु है, जो PoK से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति है। वाखान कॉरिडोर-करीब 74 किमी लंबी यह संकरी पट्टी—चीन के लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।
चीन को लंबे समय से आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी बनाकर चीन स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा और निगरानी तंत्र को और मजबूत करना चाहता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की चेतावनी के बावजूद उठाया गया यह कदम आने वाले समय में सीमा विवाद को और जटिल बना सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी हुई है और कूटनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया जारी है।
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