
नई दिल्ली। चीन के मशहूर प्रोफेसर और यूट्यूब चैनल प्रोडक्टिव हिस्ट्री के होस्ट(renowned Chinese professor and host of the YouTube channel) जुएकिन जियांग(Xueqin Jiang), जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘चीन का नास्त्रेदमस(China’s Nostradamus)’ कहा जाने लगा है, ने ईरान-अमेरिका युद्ध (the Iran-US war)को लेकर तीन चौंकाने वाली भविष्यवाणियां(startling predictions) की थीं। इन तीन भविष्यवाणियों में अब तक दो सच (proven true)साबित हो चुकी हैं, जबकि तीसरी अभी पूरी तरह से जांच के दायरे(third remains under scrutiny.) में है।
जियांग ने साल 2024 में अपने ऑनलाइन लेक्चर में कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में वापस आएंगे, फिर ईरान के साथ युद्ध की शुरुआत करेंगे, और अंत में अमेरिका ईरान से यह युद्ध हार जाएगा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके वीडियो में यह भविष्यवाणी अब तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
असल में, उनकी पहली दो भविष्यवाणियां सच हो गई हैं। ट्रंप सत्ता में वापस लौटे और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस बीच, ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजरायल और गल्फ देशों में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। जियांग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका के लिए ईरान की पहाड़ी इलाकों, लंबी सप्लाई लाइन और घरेलू विरोध चुनौती बनेगा, जो युद्ध को कठिन बना देगा।
तीसरी भविष्यवाणी सबसे चौंकाने वाली है, जिसमें जियांग ने कहा कि अमेरिका ईरान से हार जाएगा। यह भविष्यवाणी अमेरिका के सामरिक शक्ति और वैश्विक स्थिति पर सवाल उठाती है। उनके विश्लेषण में न केवल सैन्य टकराव, बल्कि भू-राजनीतिक असर और क्षेत्रीय गठजोड़ों का भी समावेश है।
जियांग ने अपनी भविष्यवाणियों को यूट्यूब पर साझा करते हुए बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि देश-दुनिया के जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और संभावित संकटों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उनके व्याख्यान में इतिहास, भू-राजनीति और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का विश्लेषण गहराई से किया गया है।
सोशल मीडिया पर जियांग के इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें चीन का नास्त्रेदमस कहा जाने लगा है। लोग उनकी सटीक भविष्यवाणियों और विश्लेषण की तारीफ कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी भविष्यवाणी पर आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह न केवल अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का नतीजा तय कर सकती है, बल्कि ग्लोबल पावर बैलेंस को भी प्रभावित कर सकती है।
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