वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में बढ़त हासिल है, लेकिन कई राज्यों में कड़े मुकाबले के कारण बहुमत का गणित चर्चा में है।
महंगाई, ईंधन की कीमतों और ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों को लेकर मतदाताओं की चिंताएं चुनावी बहस का हिस्सा हैं। कुछ राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दी है। हालांकि, चुनाव से पहले के सर्वेक्षण अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं देते।
सीनेट के चुनावी गणित को समझने के लिए छह राज्यों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इन राज्यों में टेक्सास, आयोवा, अलास्का, कैनसस, मिसिसिपी और नेब्रास्का शामिल हैं।
टेक्सास लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत आधार रहा है। वर्ष 1988 के बाद से यहां किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने अमेरिकी सीनेट का चुनाव नहीं जीता है। इस बार डेमोक्रेट जेम्स टैलारिको और रिपब्लिकन केन पैक्सटन के बीच मुकाबला है।
पैक्सटन टेक्सास के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं, जबकि टैलारिको राज्य के विधायक हैं। चुनाव से पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। सर्वेक्षणों में भी दोनों के बीच करीबी प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।
टेक्सास में परिणाम रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यहां जीत या हार सीनेट में दोनों दलों के बीच सीटों के अंतर को प्रभावित कर सकती है।
आयोवा में डेमोक्रेट जोश ट्यूरेक और रिपब्लिकन एशले हिनसन के बीच मुकाबला है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है। ऐसे में कृषि लागत, उर्वरकों की कीमतों, व्यापार शुल्क और ईंधन के दाम जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
अक्टूबर के विभिन्न सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच करीबी मुकाबला सामने आया है। हालांकि, सर्वेक्षणों के परिणामों में अंतर है और किसी एक सर्वे को पूरे राज्य के मतदाताओं की निश्चित राय नहीं माना जा सकता।
अलास्का में डेमोक्रेट मैरी पेल्टोला और रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के बीच मुकाबला है। राज्य में रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार चुनावी प्रतिस्पर्धा पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।
कुछ चुनावी सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच बहुत कम अंतर दर्ज किया गया है। ऐसे में मतदाताओं की भागीदारी और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
कैनसस में रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल का मुकाबला डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन से है। राज्य में रिपब्लिकन पार्टी का लंबे समय से मजबूत प्रभाव रहा है, लेकिन इस बार मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ी है।
कृषि, व्यापार नीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा हैं। अक्टूबर के सर्वेक्षणों में इस सीट पर भी करीबी प्रतिस्पर्धा दिखाई दी है।
मिसिसिपी में डेमोक्रेट स्कॉट कोलम और रिपब्लिकन सीनेटर सिंडी हाइड-स्मिथ चुनाव मैदान में हैं। यह राज्य परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत आधार रहा है।
अक्टूबर के चुनावी आंकड़ों में हाइड-स्मिथ को बढ़त मिलती दिखाई गई है, हालांकि सर्वेक्षणों की संख्या सीमित है। इसलिए इस सीट की स्थिति का आकलन करते समय आंकड़ों की सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है।
नेब्रास्का में रिपब्लिकन सीनेटर पीट रिकेट्स के सामने निर्दलीय उम्मीदवार डैन ओसबॉर्न हैं। ओसबॉर्न पेशे से औद्योगिक मैकेनिक रहे हैं और उन्होंने पार्टी के पारंपरिक समीकरणों से अलग अपनी उम्मीदवारी पेश की है।
इस मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार का प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो सकता है। अक्टूबर के सर्वेक्षणों में रिकेट्स और ओसबॉर्न के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर दिखाई दिया है, हालांकि अलग-अलग सर्वेक्षणों के निष्कर्ष एक जैसे नहीं हैं।
अमेरिकी सीनेट में बहुमत का असर विधेयकों, सरकारी नियुक्तियों और प्रशासन की विधायी प्राथमिकताओं पर पड़ता है। रिपब्लिकन पार्टी के पास फिलहाल 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक समूह के पास 47 वोटों का प्रभावी समर्थन है, जिसमें दो निर्दलीय सदस्य शामिल हैं।
3 नवंबर के चुनाव में कई सीटों पर करीबी मुकाबले के कारण सीनेट का अंतिम समीकरण बदल सकता है। हालांकि, केवल इन छह राज्यों के नतीजों से ही बहुमत तय नहीं होगा। अन्य राज्यों के चुनाव परिणाम और सीटों में कुल बदलाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
इसलिए मिडटर्म चुनाव को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के प्रति मतदाताओं की प्रतिक्रिया समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। चुनाव के नतीजे यह भी तय करेंगे कि राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल में रिपब्लिकन प्रशासन को सीनेट में कितना राजनीतिक समर्थन मिल पाएगा।
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