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जल्‍द तोड़ा जा सकता है दिल्ली का ये ‘मनहूस’ और विवादित बंगला, कभी CM आवास था, अब किसी की पसंद नहीं

April 01, 2026

नई दिल्ली। सिविल लाइंस के 33, शामनाथ मार्ग पर स्थित एक विशाल बंगला (Bungalow), जो कभी दिल्ली (Delhi) के मुख्यमंत्री का आवास (CM House) रहा, आज राजनीतिक बदकिस्मती और खालीपन का प्रतीक बन चुका है। यह बंगला इतने बड़े इतिहास के बावजूद अब किसी के रहने के लिए तैयार नहीं है और अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पर बुलडोजर (Bulldozer) चल सकता है।

कभी सत्ता का केंद्र, अब ‘मनहूस’

1920 के दशक में बने इस बंगले में चार बेडरूम, बड़ा ड्राइंग और लिविंग एरिया, फव्वारे, आउटहाउस, लॉन और स्टाफ क्वार्टर जैसी सुविधाएं हैं। इसकी लोकेशन और डिजाइन इतनी शानदार होने के बावजूद राजनीतिक हस्तियों ने हमेशा दूरी बनाई। कई सालों से कोई भी मुख्यमंत्री या वरिष्ठ अधिकारी इसे अपना आवास नहीं बनाना चाहता।

पिछले साल समाज कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्रजीत सिंह ने इस बंगले में रहने की संभावना पर गौर किया था, लेकिन जल्द ही उन्होंने इसका इरादा बदल लिया। अधिकारी बताते हैं कि इसके पीछे की वजह बंगले की पुरानी मान्यता है, जिसे कई लोग राजनीतिक बदकिस्मती लाने वाला मानते हैं।


  • इतिहास ने लगाया ‘मनहूस’ का टैग

    आजादी के बाद इस बंगले में कई जानी-मानी हस्तियों ने ठहराव किया, लेकिन उनके अचानक पद छोड़ने के कारण इसे बदनाम माना गया। दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश 1952 में यहां आए थे, लेकिन 1955 में गुड़ घोटाले के आरोपों के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और दिल्ली विधानसभा भंग कर दी गई।

    दशकों बाद 1993 में मदन लाल खुराना को यह बंगला मुख्यमंत्री के रूप में अलॉट किया गया। उनका कार्यकाल भी 1996 में हवाला घोटाले के आरोपों के कारण समय से पहले समाप्त हो गया। इसके बाद साहिब सिंह वर्मा ने इसे अपनाने से मना किया और अपने पुराने आवास में ही रहे।

    अन्य निवासियों की परेशानी

    पूर्व श्रम मंत्री दीप चंद बंधु 2003 में इसी बंगले में रहते हुए गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में गए और उनकी मृत्यु हो गई। IAS अधिकारी शक्ति सिन्हा ने 2013 में कुछ समय के लिए यहां निवास किया, लेकिन उन्होंने भी बाद में रिटायरमेंट ले लिया।

    सरकारी फैसले और भविष्य की योजना

    हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे ‘दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन’ के दफ्तर में बदल दिया, लेकिन 2022 में उपराज्यपाल के निर्देश पर यह व्यवस्था खत्म कर दी गई और दफ्तर को सील कर दिया गया। अब अधिकारी इस बंगले को रहने की जगह के बजाय ऑफिस स्पेस के रूप में बदलने की योजना पर विचार कर रहे हैं।

    इस बंगले का इतिहास बताता है कि कभी सत्ता के केंद्र में रहने वाला स्थान भी समय के साथ अपनी किस्मत बदल सकता है। सिविल लाइंस का यह विवादित बंगला अब शायद जल्द ही पुरानी यादों और राजनीतिक कहानियों के साथ केवल ऐतिहासिक महत्व तक सीमित रह जाएगा।

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