
इन्दौर। नगर निगम द्वारा बीआरटीएस के कॉरिडोर को प्रयोगशाला बना लिया गया है। निगम ने इस कॉरिडोर में छोटी खजरानी से लेकर विजयनगर की ओर जालियों का डिवाइडर बनाने का काम शुरू किया है। यह जालियां इसी कॉरिडोर से निकाली गई है।
बीआरटीएस के कॉरिडोर को 1 साल के लंबे समय में भी तोडऩे में नाकाम रहे नगर निगम द्वारा इस कॉरिडोर पर एक के बाद एक प्रयोग किया जा रहे हैं। कभी तोडऩे का ठेका देना, कभी ठेकेदार का भाग जाना, कभी फिर से टेंडर कर लेना जैसे काम तो अभी तक चल ही रहे हैं। पूरे कॉरिडोर की एक तरफ की जालियां निकाल दी गई है। दूसरे तरफ की जालियां यह कहते हुए नहीं निकाली जा रही हंै कि इससे वाहन दुर्घटनाएं होंगी। इसी बीच निगम द्वारा इस कॉरिडोर पर रोड डिवाइडर बनाने का ठेका भी दे दिया गया है।
अब निगम के अधिकारियों को लग रहा है कि डिवाइडर बनाने का ठेका लेने वाली एजेंसी द्वारा उस गति से काम नहीं किया जा सकेगा, जिस गति की अपेक्षा है। ऐसी स्थिति में नगर निगम द्वारा बीआरटीएस के कॉरिडोर पर एक और नया प्रयोग शुरू कर दिया गया है। इस प्रयोग के तहत निगम ने कॉरिडोर से एक साइड से जो जालियां निकली हैं, उन जालियों का उपयोग किया जा रहा है।
जालियों के तीन हिस्से को जोडक़र उनका एक भाग बनाया गया है और उसके नीचे टिकाने के लिए स्टैंड बनाए गए हैं। इस तरह से इन जालियों का अस्थायी डिवाइडर बनाने का काम शुरू हो गया है। छोटी खजरानी से विजयनगर चौराहा की तरफ यह डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। निगम के अधिकारियों का कहना है कि छोटी खजरानी से लेकर नौलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण होना है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा लोहे के पतरे की दीवार तैयार की जा रही है, जो डिवाइडर का काम करेगी। अब इस बीआरटीएस कॉरिडोर के शेष बचे हुए हिस्से में इस तरह से जालियों को लगाकर उनका उपयोग डिवाइडर के रूप में किया जाएगा।
नहीं है कोई मजबूत पकड़
जालियों को जोडक़र नगर निगम द्वारा डिवाइडर के रूप में लगाने का काम चाहे शुरू कर दिया गया है, लेकिन इन जालियों के नीचे सीमेंट का कोई माल नहीं होने के कारण इनकी कोई मजबूत पकड़ नहीं है। यदि एक गाड़ी भी इन जाली से टकराएगी तो पूरी जाली घूम जाएगी। खैर इस पूरी स्थिति से नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कोई वास्ता नहीं है।
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