
मुंबई। वित्तवर्ष 2025 तक डाटा सेंटर की क्षमता बढ़कर दोगुना होने का अनुमान है। यह अभी 870 मेगावाट है जो बढ़कर 1,700 से 1,800 मेगावाट हो सकता है। साथ ही इसमें तब तक 40,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते डिजिटाइजेशन और स्थानीयकरण के साथ इस साल के अंत तक 5जी की सेवाओं के शुरू होने डाटा की मांग तेजी से बढ़ेगी। क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि डाटा केंद्रों की मांग और क्लाउड स्टोरेज में पिछले कुछ समय से तेजी आ रही है। कॉरपोरेट एडवांस टेक्नोलॉजी का और डिजिटल इंफ्रा पर फोकस कर रहा है। दूसरी ओर स्मार्ट उपकरण का भी लोग तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
घर से काम करने से बढ़ी डाटा की मांग
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में वायरलेस मोबाइल डाटा ट्रैफिक 31 फीसदी बढ़कर 253 एक्साबाइट (1 एक्साबाइट में एक अरब गीगाबाइट) हो गया था। क्योंकि लोगों ने कोरोना की वजह से कार्यालयों के बंद होने से बड़ी संख्या में घर से काम किया। इससे डाटा की मांग में तेजी आई।
5जी से डाटा की मांग और बढ़ेगी
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 5जी सेवा के शुरू होने से डाटा की मांग में और तेजी आएगी। साथ ही सरकार भी तमाम डिजिटल पहल पर फोकस कर रही है। इसने कहा कि देश में डाटा सेंटर आकर्षक इंफ्रा असेट क्लास के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट का अनुमान है कि डाटा की मांग में मुंबई अव्वल रहेगा जो पहले से ही वर्तमान क्षमता का करीबन आधा हिस्सा का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा हैदराबाद, चेन्नई, पुणे में आगे चलकर 400 मेगावाट की मांग आ सकती है।
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