
नई दिल्ली । 26 सितंबर 1923 को जन्मे देव आनंद(DevAnand) ने हिंदी सिनेमा (Cinema) में अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय (Acting) के साथ उन्होंने निर्देशन (Direction), लेखन (Writing) और निर्माण (Production) के क्षेत्र में भी काम किया। फिल्मों में आने से पहले उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने एक अकाउंटेंसी फर्म में क्लर्क की नौकरी की, जहां उन्हें 85 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। इसके बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस में काम किया और यहां उनकी मासिक आय 160 रुपये थी।
नौकरी छोड़ने के बाद देव आनंद ने फिल्मों में करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि उन्होंने अपना स्टैंप कलेक्शन तक बेचकर गुजारा किया। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का अवसर मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।
अपने लंबे करियर में देव आनंद ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। अपनी खास अभिनय शैली और अलग अंदाज के कारण वह दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए। उनके करियर में कई यादगार फिल्में और लोकप्रिय गीत शामिल रहे, जिनकी वजह से उनकी पहचान लंबे समय तक बनी रही।
देव आनंद के स्टाइल से जुड़ा एक चर्चित किस्सा फिल्म ‘काला पानी’ के समय का है। बताया जाता है कि फिल्म की रिलीज के दौरान काले कपड़ों में उनकी एक झलक पाने के लिए महिलाओं के बीच जबरदस्त उत्साह था। एक घटना में एक महिला की जान जाने की बात भी सामने आती है। इसके बाद उन्हें काले कपड़े पहनने से मना किए जाने का जिक्र मिलता है।
देव आनंद मशहूर अभिनेता और कॉमेडियन चार्ली चैपलिन के प्रशंसक भी थे। 1954 में स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में उनकी चार्ली चैपलिन से मुलाकात हुई। उन्हें सामने देखकर देव आनंद ने उत्साह में जोर से उनका अभिवादन किया। इस मुलाकात को वह बेहद खास मानते थे।
50 और 60 के दशक में देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में शामिल थे। देव आनंद और दिलीप कुमार के बीच भी अच्छे संबंध थे। जीवन के अंतिम दिनों में देव आनंद दिलीप कुमार से उनके जन्मदिन पर मिलना चाहते थे और उन्होंने यह तारीख अपनी डायरी में भी लिख रखी थी। हालांकि, यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। देव आनंद का निधन 4 दिसंबर 2011 को हुआ, जबकि दिलीप कुमार का जन्मदिन 11 दिसंबर को था।
देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी भी हिंदी सिनेमा के चर्चित किस्सों में शामिल रही। फिल्म ‘विद्या’ के एक गाने की शूटिंग के दौरान दोनों की नजदीकियां बढ़ीं। बाद में ‘जीत’ के सेट पर देव आनंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्हें 3 हजार रुपये की हीरे की अंगूठी दी। हालांकि, सुरैया की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं। दोनों की शादी नहीं हो सकी। बाद में देव आनंद ने कल्पना कार्तिक से शादी की, जबकि सुरैया ने विवाह नहीं किया।
देव आनंद ने फिल्मों के अलावा राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इमरजेंसी के दौरान उन्होंने अपनी आवाज उठाई और 1977 के चुनावों में कुछ फिल्मी हस्तियों के साथ तत्कालीन सरकार के खिलाफ अभियान चलाया। बाद में उन्होंने नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया नाम से राजनीतिक दल भी बनाया, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चला।
उनके करियर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण किस्सा जैकी श्रॉफ से भी जुड़ा है। जैकी श्रॉफ ने एक विज्ञापन एजेंसी के लिए फोटोशूट कराया था। देव आनंद ने एक होर्डिंग पर उनकी तस्वीर देखी और उन्हें फिल्म में अवसर देने के बारे में सोचा। जैकी श्रॉफ ने 1982 में ‘स्वामी दादा’ से फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद ‘हीरो’ में उन्हें प्रमुख भूमिका मिली और वह लोकप्रिय अभिनेता के रूप में स्थापित हुए।
देव आनंद ने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ कभी स्क्रीन साझा नहीं की। प्रकाश मेहरा की ‘जंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय खन्ना की भूमिका पहले देव आनंद को ऑफर हुई थी। उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। बाद में यही भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई और यह फिल्म उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल हुई।
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