
नई दिल्ली ।अभिनेत्री दीया मिर्जा (Dia Mirza) ने अपने अभिनय करियर (Acting Career) से जुड़ी एक ऐसी आदत के बारे में बताया है, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है। उन्होंने खुलासा किया कि वह करीब 20 वर्षों (20 Years) से फिल्म की शूटिंग (Film Shooting) के दौरान सेट पर आईना नहीं देखतीं। इतना ही नहीं, वह शॉट देने के बाद मॉनिटर (Monitor) पर अपना प्रदर्शन और लुक भी चेक नहीं करतीं।
दीया मिर्जा के मुताबिक, उन्होंने यह फैसला जानबूझकर लिया है। उनका मानना है कि कैमरे के सामने अपने चेहरे, लुक या अपीयरेंस पर लगातार ध्यान देने से कलाकार का ध्यान उस पल और किरदार से हट सकता है। इसलिए वह अपने बाहरी रूप को देखने के बजाय सीन की भावनाओं और अभिनय पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करती हैं।
अभिनेत्री ने बताया कि करियर की शुरुआत में ही उन्हें यह समझ आने लगा था कि अपने लुक्स को लेकर जरूरत से ज्यादा सजग रहना उनके लिए सही नहीं है। इसके बाद उन्होंने शूटिंग के दौरान आईना देखने और शॉट के बाद मॉनिटर चेक करने की आदत छोड़ दी। उनके अनुसार, इस बदलाव से उन्हें काम करते समय बेहतर महसूस होता है।
दीया का कहना है कि फिल्म निर्माण में कलाकार की उपस्थिति निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होती है। बाल, मेकअप, कपड़े और पूरा लुक किसी किरदार की दृश्य पहचान का हिस्सा होते हैं। इन सभी चीजों पर पूरी टीम काफी मेहनत करती है। इसलिए अभिनेत्री अपने किरदार के लिए तैयार किए गए लुक का सम्मान करती हैं, लेकिन उसे बार-बार आईने में देखकर खुद पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहतीं।
उनका फोकस किरदार के उस भावनात्मक क्षण पर रहता है, जिसे कैमरे के सामने प्रस्तुत करना होता है। दीया के मुताबिक, वह यह सोचने के बजाय कि कैमरे में कैसी दिख रही हैं, इस बात पर ध्यान देती हैं कि उस समय उनका किरदार क्या महसूस कर रहा है और उस भावना को दर्शकों तक किस तरह पहुंचाया जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दीया अपने किरदार के पहनावे को लेकर लापरवाह रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने आउटफिट को लेकर काफी सजग रहती हैं। किरदार के लिए कौन से कपड़े चुने गए हैं, किस कलाकार ने उन पर काम किया है, कपड़े का फैब्रिक और टेक्सटाइल क्या है तथा किस तरह का रंग इस्तेमाल किया गया है, इन सभी पहलुओं पर वह ध्यान देती हैं।
उनके लिए यह तैयारी किरदार की समग्र पहचान का हिस्सा है। लेकिन एक बार कॉस्ट्यूम, मेकअप और लुक तय हो जाने के बाद वह अपने रूप को लेकर लगातार सोचने से बचती हैं। उनका मानना है कि यही प्रक्रिया उन्हें मानसिक रूप से शांत रहने और अभिनय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है।
दीया मिर्जा ने अपीयरेंस को लेकर समाज में मौजूद दबाव की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि खासकर युवा लड़कियों पर कॉस्मेटिक बदलाव कराने और अपने रूप को लेकर असुरक्षित महसूस करने का दबाव बनाया जाता है। उन्हें बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे पर्याप्त सुंदर नहीं हैं।
अभिनेत्री चाहती हैं कि उनकी सोच युवा लड़कियों को अपने रूप के साथ स्वस्थ संबंध बनाने के लिए प्रेरित करे। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके चेहरे या बाहरी सुंदरता से तय नहीं होनी चाहिए। आत्मविश्वास और अपनी क्षमता पर भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दीया मिर्जा का 20 वर्षों से सेट पर आईना और मॉनिटर नहीं देखने का फैसला इसी सोच से जुड़ा है। वह अपने लुक को लेकर लगातार मूल्यांकन करने के बजाय अभिनय, किरदार और कहानी के उस क्षण पर ध्यान देना पसंद करती हैं, जिसे वह दर्शकों के सामने पेश कर रही होती हैं।
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