img-fluid

मिडिल ईस्ट संकट का सीधा वार श्रीलंका में ईंधन महंगा जनता और परिवहन पर भारी असर

March 23, 2026

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया(West Asia) में बढ़ते तनाव(Rising Tensions) का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है और इसका ताजा उदाहरण श्रीलंका (Sri Lanka)है जहां ईंधन की कीमतों में भारी उछाल ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। ईरान(Iran) अमेरिका और इजरायल (Israel)के बीच जारी टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है और इसका सीधा असर छोटे और आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

इसी कड़ी में श्रीलंका सरकार ने रविवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी एक सप्ताह के भीतर दूसरी और मार्च महीने की तीसरी बड़ी वृद्धि है। नई दरों के लागू होने के बाद देश में ईंधन की कीमतें 400 श्रीलंकाई रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं जो आम जनता के लिए बड़ा झटका है।

सरकारी ईंधन कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ऑटो डीजल की कीमत 303 रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये पहुंच गया है। 92 ऑक्टेन पेट्रोल 317 से बढ़कर 398 रुपये और 95 ऑक्टेन पेट्रोल 365 से बढ़कर 455 रुपये प्रति लीटर हो गया है। केरोसिन की कीमत में भी सबसे ज्यादा 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

दरअसल इस पूरे संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति होती है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया के चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर असर पड़ा है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी आई है।

इस बढ़ोतरी ने श्रीलंका के परिवहन क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की कीमत में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है और बिना किराया बढ़ाए संचालन संभव नहीं है। बस मालिकों ने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है जबकि राष्ट्रीय परिवहन आयोग के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी जरूरी है। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है।

सरकार का कहना है कि बढ़ी कीमतों के बावजूद वह ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है। सरकारी प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा के मुताबिक डीजल पर 100 रुपये और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है जिससे हर महीने 20 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो सरकार को 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त भार उठाना पड़ता।

 

  • हालांकि विपक्ष ने सरकार पर जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाया है और कहा है कि ईंधन पर भारी टैक्स हटाकर राहत दी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने 2022 के आर्थिक संकट की यादें ताजा कर दी हैं जब देश को भारी वित्तीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा था।

    कुल मिलाकर वैश्विक भू राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऊर्जा पर निर्भरता किस तरह किसी देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को प्रभावित कर सकती है।

    Share:

  • IPL में पहली बार कप्तान बने और छा गए ये 4 खिलाड़ी बन गए इतिहास के सबसे खास विजेता

    Mon Mar 23 , 2026
    नई दिल्ली : ( Indian Premier League )जैसी हाई प्रेशर लीग में कप्तानी करना हर खिलाड़ी के बस की बात नहीं होती। यहां हर मैच के साथ उम्मीदें (expectations) और दबाव (pressure) दोनों बढ़ते जाते हैं। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने न सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया बल्कि अपने पहले ही […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved