
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल (Iran and Israel) के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब यहां भी महसूस की जा रही है. इस बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़े लहजे में चेतावनी दी है. केरल में आयोजित ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ के मंच से राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट का फायदा उठाकर भारत में किसी भी तरह का दुस्साहस किया, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.
’22 मिनट का खौफ याद रखे पाकिस्तान’
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाई. उन्होंने कहा, ‘दुनिया ने देखा कि कैसे भारतीय जांबाजों ने महज 22 मिनट के भीतर पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था.’ बता दें, 2 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर 9 आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूत कर दिया था.
राजनाथ ने जोर देकर कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है और भारत की प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होगी. रक्षा मंत्री ने साथ ही कहा, ‘आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है. वह इसके खिलाफ सरहद के इस पार और उस पार दोनों तरफ कार्रवाई करता है. चाहे ‘उरी अटैक’ के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक हो, ‘पुलवामा’ के बाद की गई एयर स्ट्राइक हो या फिर अभी ‘पहलगाम’ की घटना के बाद किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हो, हमने आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त प्रहार किया है.’
पाकिस्तान की ‘फॉल्स फ्लैग’ वाली चाल
रक्षा मंत्री की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तानी मीडिया लगातार यह प्रोपेगेंडा फैला रहा है कि भारत, इस्लामाबाद के खिलाफ किसी ‘फॉल्स फ्लैग’ ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ ने दावा किया था कि भारत दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर सकता है. हालांकि, भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान खुद अपनी अंदरूनी कमजोरियों और अफगानिस्तान के साथ चल रही ‘खुली जंग’ से ध्यान हटाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहा है.
सऊदी और ईरान के बीच फंसा पाकिस्तान
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच ‘नाटो’ की तर्ज पर एक रक्षा समझौता हुआ है, जिसके तहत सऊदी पर हमला होने पर पाकिस्तान को उसकी मदद करनी होगी. अगर सऊदी अरब ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरता है, तो पाकिस्तान चाहकर भी इससे बच नहीं पाएगा. पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक शिया-बहुल देश (ईरान) के खिलाफ इजरायल या अमेरिका के पाले में खड़ा नहीं दिखना चाहता, क्योंकि इससे उसके अपने देश की 20% शिया आबादी भड़क सकती है.
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