
जबलपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सांदीपनि विद्यालय योजना अब केवल सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। नए शिक्षण सत्र से सांदीपनि स्कूलों की खाली सीटों पर निजी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को भी प्रवेश दिया जाएगा। संचालक लोक शिक्षण द्वारा जारी आदेश ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार अब चुनिंदा विद्यालयों को मॉडल एजुकेशन सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि इस फैसले के पीछे सिर्फ प्रवेश बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है। इसके जरिए सरकार सरकारी स्कूलों के कन्सॉलिडेशन (एकीकरण) की बड़ी योजना पर भी काम कर रही है, जिसके तहत सांदीपनि विद्यालयों के आसपास संचालित कई सरकारी स्कूलों को उनमें समाहित किया जा सकता है।
पहली बार निजी स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मौका
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब निजी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए भी सांदीपनि विद्यालयों के द्वार खुलेंगे। आदेश के अनुसार ऐसे निजी विद्यालय, जहां केवल माध्यमिक या हाईस्कूल स्तर तक ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है और आगे की पढ़ाई के लिए आसपास कोई शासकीय विद्यालय उपलब्ध नहीं है, वहां के विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश दिया जा सकेगा। इसके अलावा निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ रहे और 8वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थियों को भी 9वीं कक्षा में सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
मेरिट, परीक्षा और लॉटरी से होगा चयन
सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
कक्षा 6वीं से 11वीं तक: प्रवेश पूर्व कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट से होगा।
आगामी वर्षों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर चयन किया जाएगा।
कक्षा 1वीं से 5वीं तक:आरटीई प्रावधानों के अनुसार प्रवेश दिए जाएंगे। सीटों की उपलब्धता के अनुसार लॉटरी प्रणाली भी लागू की जा सकती है। अर्थात अब सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश केवल सामान्य प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि प्रतिस्पर्धा के आधार पर विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
खाली सीटों को भरने की कवायद या शिक्षा सुधार?
शिक्षा विभाग के इस निर्णय को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। एक वर्ग इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे सरकारी स्कूलों की घटती संख्या और छात्र संख्या की समस्या से जोड़कर देख रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि सांदीपनि विद्यालयों में बेहतर शिक्षक, आधुनिक लैब, डिजिटल क्लास और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो यह मॉडल सफल हो सकता है। लेकिन केवल स्कूलों के विलय से शिक्षा की गुणवत्ता स्वत: नहीं बढ़ेगी।
प्राचार्यों को दिए गए हैं विशेष अधिकार
नए निर्देशों के तहत विद्यालय प्राचार्यों को रिक्त सीटों की संख्या के आधार पर प्रवेश देने के अधिकार भी दिए गए हैं। यानी स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए प्राचार्य स्तर पर भी निर्णय लिए जा सकेंगे। हालांकि इससे पारदर्शिता और प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने की संभावना भी बनी हुई है।
क्या बदलने जा रहा है?
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