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Energy Crisis: आधे काफिले के साथ चलेंगे PM मोदी; खुद से की शुरुआत, जानें अब कितनी गाड़ियां और कमांडो रह जाएंगे?

May 13, 2026

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री (PM ) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सरकारी खर्च में कटौती करने के लिए और ईंधन की बचत (Fuel Saving) के लिए एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है. पीएम मोदी ने खुद पहल करते हुए अपनी सुरक्षा में तैनात SPG यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को निर्देश दिया है कि उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या को 50% तक कम कर दिया जाए. अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर पीएम के साथ कितनी गाड़ियों का काफिला चलता है और अब कितनी गाड़ियों का काफिला चलेगा? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब.

सुरक्षा से जुड़े नियमों से समझौता नहीं
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने सुरक्षा के ब्लू बुक नियमों का पालन करते हुए काफिले को छोटा करने को कहा है. हाल ही में दिल्ली से बाहर के दौरे में पीएम का काफिला पहले के मुताबिक छोटा नजर आया है. इसके साथ ही, पीएम ने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन यह भी साफ किया है कि इसके लिए नई गाड़ियां खरीदकर अतिरिक्त सरकारी खर्च न बढ़ाया जाए.


  • पीएम के काफिले में कितनी गाड़ियां?
    पीएम नरेंद्र मोदी के काफिले में कई गाड़ियां शामिल होती हैं. पीएम मर्सिडीज-मेबैक S650 गार्ड और रेंज रोवर सेंटिनल का इस्तेमाल करते हैं. साथ ही काफिले में एस्कॉर्ट के लिए टोयोटा फॉर्च्यूनर और टोयोटा लैंड क्रूजर का इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही एक दर्जन और गाड़ियां पीएम के काफिले में शामिल होती हैं. प्रधानमंत्री के काफिले के साथ एक जैमर गाड़ी भी साथ होती है, जो रोड के दोनों ओर 100 मीटर के दायरे में किसी भी डिवाइस को डिफ्यूज कर सकती है. पीएम के काफिले में एक डमी कार भी चलती है, जिससे आतंकियों को गुमराह किया जा सके. पीएम के काफिले में करीब 100 जवान शामिल होते हैं. अब पीएम के निर्देश के बाद SPG सुरक्षा को देखते हुए वाहनों की संख्या कम करेगी.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हर समय SPG के करीब 24 कमांडो के सबसे करीबी घेरे में रहते हैं. ये 4-लेयर की सुरक्षा का हिस्सा होते हैं और उनके आसपास रहते हैं. पीएम के फैसले के बाद कमांडो की संख्या में भी कुछ बदलाव होगा या नहीं, अभी यह स्पष्ट नहीं है.

    बाकी विभागों के लिए भी संदेश
    पीएम मोदी की इस पहल को देश के लिए एक बड़े संकेत के रूप मे देखा जा रहा है. अब भारत सरकार के दूसरे मंत्रालय और विभाग भी फिजूलखर्ची रोकने के लिए कमर कस रहे हैं. सरकार के भीतर इन उपायों पर चर्चा तेज हो गई है कि,

    कर्मचारियों को ऑफिस आने-जाने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना.

    अधिकारी एक ही गाड़ी शेयर कर ऑफिस पहुंचे.

    गैरजरूरी यात्रा और बड़े कार्यक्रम के आयोजन से बचना.

    मंत्रियों की बैठक में भी हुई चर्चा
    हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों के बैठक में भी ईंधन के उपयोग को कम करने पर चर्चा हुई. पीएम मोदी ने पहले ही हैदराबाद दौरे के दौरान देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील की थी.

    पीएम मोदी के इस फैसले के पीछे का कारण?
    बता दें कि पीएम मोदी का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वह लगातार देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं. पश्चिम एशिया के तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण ईंधन शिपिंग प्रभावित हुई है, जिसको देखते हुए पीएम मोदी ने रविवार को हैदराबाद दौरे के दौरान लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील भी की थी. इसके मात्र कुछ ही घंटे के बाद पीएम ने गुजरात से भी यही अपील दोहराई.

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