
इंदौर। भले ही हल्की हवा या बारिश में शहर की बत्ती गुल हो जाती है, मगर अब केन्द्र सरकार की एक योजना के चलते मध्यप्रदेश के महू सहित रक्षा प्रतिष्ठानों और बड़े शहरों की बिजली अति आपात स्थिति में भी गुल नहीं होगी। इसके लिए इलेक्ट्रिकल आई लैंडिंग प्रोजेक्ट अमल में लाया जा रहा है और बकायदा इसके टेंडर भी जारी किए गए हैं, जिसके बाद इंदौर, भोपाल, जबलपुर सहित प्रमुख शहरों में युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी बिजली व्यवस्था बहाल रखी जा सकेगी। अभी गत वर्ष ऑपरेशन सिंदूर, जो पाकिस्तान के खिलाफ लॉन्च किया गया, उस दौरान ब्लैक आउट भी करवाया गया था और तब इस प्रोजेक्ट की अहमियत समझी गई।
कई मर्तबा राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क और वेस्टर्न ग्रीड में तकनीकी खराबी के चलते भी बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है और युद्ध के दौरान अगर किसी ग्रीड पर हमला हो जाता है तो पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब सकता है, जिसके चलते अब महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ बड़े शहरों में इलेक्ट्रिकल आई लैंडिंग प्रोजेक्ट अमल में लाया जा रहा है। दरअसल, अभी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जबलपुर में आर्मी प्रोडक्शन यूनिट के लिए इसी तरह के सिस्टम को तैयार किया गया था। इंदौर के पास चूंकि महू में मिलेट्री हेड क्वार्टर है, लिहाजा अब इंदौर को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है और बिजली कम्पनी के आला अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के अमल में आने के बाद किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में भी बिजली सप्लाय में दिक्कत नहीं आएगी।
जानकारी के मुताबिक पॉवर सिस्टम आईलैंडिंग तब होती है जब वितरित उत्पादन पॉवर सिस्टम ग्रीड से अलग हो जाता है और ग्रीड के उस हिस्से को बिजली प्रदान करना जारी रखता है, जिससे वह जुड़ा रहता है। आई लैंडिंग यानी द्वीप मोड ऑपरेशन उन बिजली संयंत्रों से संबंधित होता है जो राष्ट्रीय या स्थानीय बिजली नेटवर्क से अलग होने के बावजूद काम करते हैं, जिसमें एक डिजी एक स्थान को बिजली देना जारी रखता है। इस तरह के सिस्टम को सेफ झोन भी कहा जाता है और इसके दायरे में महत्वपूर्ण सेंटर शहर और रक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ हॉस्पिटल जैसी अति महत्वपूर्ण सेवाओं को शामिल किया जाता है।
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