
नलखेड़ा। अच्छे स्वप्न देखने के बाद निद्रा नहीं लेते हुए शेष रात्रि जागकर धर्म जागरण कर प्रभुभक्ति, स्मरण करना चाहिए। स्वप्न अच्छे हो या बुरे हो किसी को भी नहीं सुनाना चाहिए। देव, गुरु व ज्योतिष के पास जायें तो कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।धर्म के प्रभाव से कुस्वप्न भी सुस्वप्न का फल देने वाले बन जाते है। पयूर्षण महापर्व के अन्तर्गत चल रहे कल्पसूत्र व्याख्यान के दौरान स्वप्न फलों का विशद वर्णन करते हुए ओमकार परिवार के सदस्य सुश्रावक समकित वीरवाडिया, जय जैन ने यचह बात कही। उन्होंने बताया कि अन्य किसी के समक्ष स्वप्न की बात सुनाने से अच्छा फल देने वाला स्वप्न भी खराब फल देने वाला बन जाता है। रात्रि के प्रथम प्रहर में देखे गए स्वप्न 12 माह में, द्वितीय प्रहर में देखे गए स्वप्न का फल 6 माह में, तृतीय प्रहर में देखे गए स्वप्न का 3 माह में व चतुर्थ प्रहर में देखे गए स्वप्न 1 माह में फल देने वाले होते है। इसी प्रकार सूर्योदय से 48 मिनिट पूर्व देखा गया स्वप्न 15 दिनों में तथा सूर्योदय के समय देखा गया स्वप्न तत्काल ही फल देने वाला होता है। पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत सोमवार को श्री चंद्रप्रभु जैन श्वेतांबर मंदिर जी से नगर में कलश यात्रा चल समारोह निकाला गया जो नीमा कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर पहुंचा। जहां से कलश भरकर मंदिर पर परमात्मा का कलश अभिषेक किया गया।
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