
धनबाद। झारखंड (Jharkhand) के धनबाद (Dhanbad) में फर्जी कंपनी (Fake Company) बनाकर 12 करोड़ के जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग ने जांच के दौरान मंगलवार को पाया कि मनीष इंटरप्राइजेज नामक एक फर्जी कंपनी ने 12 करोड़ रुपए की जीएसटी (GST worth 12 crore rupees) चोरी की है। यह कंपनी राजकुमार सिंह के नाम से पंजीकृत है। प्रारंभिक जांच में इसका लेनदेन पूरी तरह संदिग्ध मिला है।
राज्य कर विभाग के अनुसार मनीष इंटरप्राइजेज का जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरसा के तेतुलिया क्षेत्र के एक पते पर कराया गया था। मंगलवार को विभागीय अधिकारियों की टीम सत्यापन के लिए उक्त पते पर पहुंची। वहां कोई कंपनी मौजूद नहीं पाई गई। मकान मालिक ने भी साफ तौर पर वहां किसी प्रकार की कंपनी के संचालन से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने मकान मालिक को वह रेंट एग्रीमेंट दिखाया, जिसके आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया था। मकान मालिक ने ऐसे किसी भी रेंट एग्रीमेंट से साफ इनकार कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने शुरुआत में सीमेंट, लोहा और छड़ के व्यापार का हवाला देकर जीएसटी में पंजीकरण कराया था। बाद में इसमें कोयले के व्यापार को भी शामिल कर लिया गया। इसी व्यवसाय के आधार पर बड़े पैमाने पर ई-वे बिल जेनरेट किए गए और बोगस इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत तरीके से लाभ उठाया गया।
राज्य कर अधिकारियों के मुताबिक विभाग के एडवांस्ड एनालिटिकल टूल्स के जरिए कंपनी के असामान्य लेनदेन, संदिग्ध टर्नओवर और इनपुट टैक्स क्रेडिट के पैटर्न को चिह्नित किया गया था। इन संकेतों के आधार पर जब विस्तृत जांच शुरू की गई तो कर चोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर यह राशि और बढ़ सकती है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मनीष इंटरप्राइजेज का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही कर चोरी में शामिल अन्य लोगों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। राज्य कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी चोरी के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और फर्जी कंपनियां बनाकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
10 फर्जी कंपनी से 3 करोड़ के घोटाले का हुआ था खुलासा
धनबाद में 10 फर्जी कंपनी बना कर तीन करोड़ के जीएसटी घोटाले का सोमवार को पर्दाफाश हुआ था। ये कंपनियां सिर्फ कागजों पर ही अस्तित्व में थीं। जिन पतों पर इनके कार्यालय दर्शाए गए थे, वहां कोई कंपनी संचालित नहीं हो रही थी।
राज्य कर विभाग ने संदेह के आधार पर 56 कंपनियों की विस्तृत जांच शुरू की। जांच टीम जब निर्धारित पते पर पहुंची तो 10 कंपनियों के कार्यालय वहां मौजूद ही नहीं थे। न तो कोई व्यावसायिक गतिविधि चल रही थी और न ही कंपनी से जुड़े किसी व्यक्ति का कोई सुराग मिला।
जांच में सामने आया है कि इन फर्जी कंपनियों के जरिए बोगस इनवॉइसिंग कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ लिया गया। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फर्जी टर्नओवर दिखाकर टैक्स चोरी की गई। कागजी लेनदेन के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी का दावा किया गया, जबकि वास्तविक रूप से किसी प्रकार के सेवा का आदान-प्रदान नहीं हुआ था।
अधिकारियों के अनुसार करीब तीन करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। राज्य कर विभाग अब इस मामले में सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। सभी फर्जी कंपनियों के साथ ही इन कंपनियों से जुड़े संचालकों, निदेशकों और लाभार्थियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी चोरी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे मामलों में आगे भी सघन जांच अभियान जारी रहेगा।
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