
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (Middle East) में भड़के युद्ध का असर अब समुद्री रास्तों (sea routes) तक पहुंच गया है। ओमान (Oman) के समुद्री क्षेत्र में दो जहाजों में आग लगने की घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर दिया है। इनमें से एक जहाज पर सवार तीन भारतीय नागरिक (Indian nationals) की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों (international shipping lanes) की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि एमकेडी व्योम नामक टैंकर पर सवार तीन भारतीयों की जान चली गई। यह जहाज मस्कट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर समुद्र में मौजूद था। मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले इस टैंकर के मुख्य इंजन कक्ष में विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई। राहत और बचाव अभियान के तहत चालक दल के शेष 21 सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया जिनमें 16 भारतीय चार बांग्लादेशी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक ओमान की रॉयल नेवी क्षतिग्रस्त टैंकर की निगरानी कर रही है और उस समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को नेविगेशन संबंधी चेतावनियां जारी की गई हैं। बताया गया है कि टैंकर में करीब 59 हजार मीट्रिक टन माल लदा था जिससे संभावित पर्यावरणीय खतरे की भी आशंका बनी हुई है।
एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में भी एक अन्य तेल टैंकर एमवी स्काईलाइट पर हमला हुआ था जिसमें चार चालक दल के सदस्य घायल हो गए। इस जहाज पर भारत और ईरान के नागरिक सवार थे। दो सदस्य लापता बताए जा रहे हैं जिनमें एक भारतीय शामिल है। भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और खोज अभियान जारी है।
क्षेत्र में यह तनाव ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बाद और तेज हुआ है। रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय है।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी क्रूड 7 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 8 प्रतिशत उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। यूरोप में प्राकृतिक गैस वायदा में 40 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई क्योंकि प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ता कतर ने संघर्ष के कारण उत्पादन रोकने की घोषणा की है।
समुद्र में बढ़ते हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। भारतीय नागरिकों की मौत ने इस संकट को भारत के लिए भी संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर नई रणनीति बन सकती है क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाला हर जहाज अब संभावित खतरे के साए में है।
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