
नई दिल्ली. पाकिस्तान ( Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) के बीच संघर्ष तीव्र (Conflict intensifies) हो गया है. पाकिस्तानी सेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया में एयर स्ट्राइक (airstrike) की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा चौकियों पर बड़े हमले शुरू किए. दोनों पक्षों की जवाबी कार्रवाई से तनाव बढ़ा है, और कतर की मध्यस्थता में युद्धविराम खतरे में है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश की सुरक्षा का संकल्प जताया, जबकि तालिबान ने जोरदार जवाब की चेतावनी दी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का कहना है कि वह अपने मुल्क के क्षेत्र की एकता और शांति से किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेगा. दूसरी ओर, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने ज़ोरदार पलटवार करने की चेतावनी दी है.
अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 26 फरवरी की रात को पाकिस्तानी सेना ने अफगानी क्षेत्र में वैसे हमले किए जिनमें महिलाओं और बच्चों की जान गई. मंत्रालय के अनुसार, अफगान सेनाओं ने पकतिका, पकतिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों में बदले की कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे धकेल दिया. इस लड़ाई में दो सैन्य बेस, 19 पोस्ट कब्जे में लिए गए और चार पोस्ट से पाकिस्तानी सैनिक फरार हो गए.
दोनों मुल्कों के बीच शुरू हुए संघर्ष से कतर-मध्यस्थता वाला युद्धविराम खतरे में है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ रही है.
डूरंड लाइन क्या है, जिस पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच है विवाद
डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगभग 2,640 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा है. यह सीमा 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मॉर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच हुए समझौते द्वारा स्थापित की गई थी. इसका उद्देश्य ब्रिटिश और रूसी साम्राज्यों के बीच एक सुरक्षात्मक बफर जोन बनाना था. हालांकि, अफगानिस्तान ने इस सीमा को कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया, क्योंकि यह अफगानिस्तान की प्रमुख पश्तून जनजातियों को दो हिस्सों में विभाजित कर देती है.
1947 में पाकिस्तान के गठन के बाद यह विवाद और भड़क गया. अफगानिस्तान ने अपने पश्तून बहुल इलाकों को वापस मांगने के साथ ‘पश्तूनिस्तान’ नामक एक अलग प्रदेश की मांग की, जिसे पाकिस्तान ने हमेशा ठुकराया है. तालिबान सरकार भी डूरंड लाइन को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानने से इंकार करती है और पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाई जा रही बाड़ का विरोध करती है.
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