
वॉशिंगटन। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (President Donald Trump) के बीच मंगलवार को हुई फोन बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बातचीत पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन (John Bolton) ने बड़ा बयान दिया है।
ईरान के तेल राजस्व पर निशाना
जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान की सैन्य गतिविधियां उसके तेल से होने वाली कमाई पर टिकी हैं। उनका मानना है कि इस राजस्व को रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही आय क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को प्रभावित करती है और ईरान की “युद्ध मशीन” को चलाती है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र
बोल्टन ने यह भी संकेत दिया कि मोदी और ट्रंप की बातचीत में भारत की ऊर्जा जरूरतों और ईरान से तेल आयात पर चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा कि भारत अब भी ईरान से तेल खरीदने में रुचि रखता है और हाल ही में भारतीय जहाजों की आवाजाही होर्मुज जलडमरूमध्य से हुई है।
होर्मुज की नाकाबंदी की सलाह
पूर्व एनएसए ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका को ईरान के राजस्व स्रोतों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर ईरान के तेल निर्यात को बाधित किया जा सकता है।
पश्चिम एशिया तनाव और भारत का रुख
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने पांच दिन के संघर्ष विराम की घोषणा की है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कहा कि भारत अपने समुद्री और प्रवासी हितों की रक्षा के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है, जो लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
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