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महात्मा गांधी से वांगचुक तक…जब बड़ी मांगों के लिए दिग्गजों ने छोड़ा अन्न-जल

July 18, 2026

नई दिल्ली। 20 दिनों के अनशन के बाद शुक्रवार की सुबह सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को जंतर-मंतर से उठा लिया गया। हाई कोर्ट (High Court) के आदेश पर वांगचुक की बिगड़ी सेहत को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बता दें सोनम पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ और कॉकरोच जनता पार्टी के सपोर्ट में यह हड़ताल कर रहे थे। वांगचुक का यह पहला अनशन नहीं था इससे पहले भी कई बार वो सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते आये हैं। बता दें सरकार से अपनी मांगों को मनवाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन अनशन का सहारा लेते है। देश को आजादी दिलाने के लिए खुद महात्मा गांधी ने भूख की थी। भारत में भूख हड़ताल का काफी लंबा इतिहास है। आइए सिलसिलेवार तरीके से इस पर नजर डालते हैं।

महात्मा गांधी का अंग्रेजों के खिलाफ अनशन
भारत की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी ने कई बार भूख हड़ताल का सहारा लिया। साल 1924 में महात्मा गांधी ने सितंबर महीने में हिंदू-मुस्लिम दंगों को रोकने और देश में सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करने के लिए 21 दिनों का उपवास रखा था। इसके बाद साल 1933 में महात्मा गांधी ने 8 मई से 29 मई तक 21 दिनों का उपवास रखा। यह अनशन किसी ब्रिटिश नीति के विरोध में नहीं, बल्कि भारतीय समाज में व्याप्त छुआछूत (अस्पृश्यता) के कलंक को मिटाने और ‘हरिजनों’ (दलितों) के उत्थान के लिए एक आत्म-शुद्धि का कदम था।

जतींद्र नाथ दास का 63 दिनों का अनशन
स्वतंत्रता सेनानी जतींद्र नाथ दास (जतिन दास) ने भारतीय राजनीतिक कैदियों के अधिकारों के लिए लाहौर की बोर्स्टल जेल में 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू की थी। 63 दिनों की इस लंबी और असहनीय भूख हड़ताल के बाद 13 सितंबर 1929 को मात्र 24 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।


  • पोट्टी श्रीरमालू का 56 दिनों का आमरण अनशन
    भारत में भूख हड़ताल के सन्दर्भ में पोट्टी श्रीरामलू का नाम भी काफी चर्चा में रहता है। श्रीरामुलु स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने आंध्र प्रदेश बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन्होंने 19 अक्टूबर 1952 को आंध्र प्रदेश के गठन की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। अनशन के 56 दिनों बाद 15 दिसंबर 1952 को हालत खराब होने से उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद देश की सरकार हरकत में आई और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आंध्र प्रदेश राज्य के गठन का एलान किया था।

    लोकपाल बिल के लिए अन्ना हजारे का अनशन
    समाज सेवी अन्ना हजारे ने 5 अप्रैल 2011 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकपाल बिल की मांग को लेकर अनशन शुरू किया था। इस उपवास ने भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में सरकार विरोधी आंदोलन शुरू कर दिया था। इस आंदोलन में देशभर के युवाओं, नेताओं और आम लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। सरकार के प्रस्तावित कानून से असहमति के बाद हजारे ने अगस्त 2011 में आना ने दूसरे अनिश्चितकालीन अनशन का एलन किया।

    विरोध शुरू होने से पहले ही उन्हें कुछ समय के लिए गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे लोगों में बहुत आक्रोश फैल गया। इसके बाद यह आंदोलन रामलीला मैदान में शिफ्ट कर दिया गया, जहां रोज हजारों समर्थक इकट्ठा होते थे। अन्ना के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन से आखिरकार लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट, 2013 पास हुआ, जिससे भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का रास्ता साफ हुआ। इस आंदोलन को इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) कहा गया। बाद में इसी आंदोलन ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी बनाने का रास्ता बनाया।

    प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का 111 दिनों का आमरण अनशन
    सोनम वांगचुक के अनशन के समय सबसे ज्यादा चर्चा एक और नाम की हुई वो हैं पर्यावरणविद और गंगा संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करने के वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की रही। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को संन्यास लेने के बाद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना गया। गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने की मांग को लेकर ज्ञानस्वरूप ने कई बार अनशन किया और आखिरकार साल 2018 में 111 दिनों के आमरण अनशन के दौरान उनका निधन हो गया।

    इरोम शर्मिला का 16 साल का अनशन
    मणिपुर की रहने वाली औए आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम चानू शर्मिला ने राज्य से AFSPA (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) हटाने की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। उन्होंने साल 2000 में यह अनशन शुरू किया। यह विरोध असम राइफल्स के जवानों द्वारा करीब 10 नागरिकों की हत्या के विरोध में था। उन्होंने लगातार 16 सालों तक अनशन किया, लेकिन सरकार ने जबरदस्ती उन्हें नाक से पोषण देने की व्यवस्था की। 9 अगस्त 2016 को अपना अनशन समाप्त किया और विरोध जारी रखा। हालांकि, उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी।

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