इस्लमाबाद। पाकिस्तान की राजनीति (politics of pakistan) में सेना से अपने रिश्तों के उतार-चढ़ाव के बाद भी शरीफ खानदान (Sharif family) आज अपना प्रभाव रखता है। पूर्व पीएम नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ आज यहां प्रधानमंत्री हैं, तो वहीं, दूसरी तरफ उनकी बेटी मरियम नवाज पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री हैं।
लगातार पाकिस्तानी सत्ता के केंद्र में बना यह परिवार पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी आवाम के निशाने पर बना हुआ है। इसका प्रमुख कारण है पाकिस्तान का अपनी वर्षों पुरानी विदेश नीति को साइ़़ड करके ट्रंप के इशारों पर इजरायल के साथ जाकर खड़े हो जाना, तो वहीं दूसरी तरफ मरियम के बेटे की शादी में बेतहाशा खर्च और उनकी बहू का भारतीय डिजायनर के कपड़े पहनना।
मरियम के बेटे की शाही शादी पर बढ़ता विवाद
पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर मरियम के बेटे की दूसरी शादी को शाही शादी कहकर इस पर तंज कसा जा रहा है। इस शादी में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से लेकर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से लेकर तमाम बड़े-बड़े लोग शामिल हुए।
इस शादी को लेकर मरियम के महंगे कपड़ों और दुल्हन के भारतीय डिजाइनर से सिलवाए गए कपड़ों को लेकर भी तंज कसा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर जारी इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए पाकिस्तानी पंजाब की मंत्री अजमा बुखारी ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि मरियम के कपड़ों की वजह से दुल्हन से ज्यादा ध्यान उन्हीं पर चला गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मरियम स्वभाव से ही बहुत सुंदर हैं। जब भी वह सार्वजनिक रूप से सामने आती हैं, लोग स्वाभाविक रूप से उनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं।”
मरियम सरकार भले ही इस मामले पर कुछ भी कहे लेकिन पाकिस्तानी आवाम ने उनके उपर निशाना साधना जारी रखा है। पाकिस्तान पत्रकार और विश्लेषक मुजीबुर रहमान ने पीटीआई से कहा कि इस शादी को लेकर लोगों की आपत्तियां जायज हैं। उन्होंने कहा, “मुद्दा शादी नहीं है, मुद्दा सत्ता है। जो लोग देश चलाते हैं वह जनता से टैक्स वसूलते हैं। ऐसे लोग आम नागरिक नहीं होते हैं। ऐसे में उनकी जीवनशैली सार्वजनिक मुद्दा बन जाती है। यही कारण है कि दुनिया भर में शासकों से पूछा जाता है,यह पैसा कहाँ से आया? इतना खर्च कैसे संभव हुआ?” रहमान ने कहा कि जब मरियम नवाज़ खुद रिकॉर्ड पर कह चुकी हैं कि उनका कोई कारोबार या संपत्ति नहीं है, तो शादी में खर्च हुए अरबों रुपये एक खुला रहस्य बन जाते हैं।
शहबाज सरकार के बोर्ड ऑफ पीस में जाने पर नाराजगी
पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो इजरायल को एक देश के रूप में स्वीकार नहीं करता है। उसके मुताबिक उस क्षेत्र में इजरायल जैसा कोई देश नहीं है, वहां पर केवल फिलिस्तीन है। लेकिन वैश्विक राजनीति में ट्रंप के आने के बाद पाकिस्तान इजरायल के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारों पर गाजा पीस बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले ट्रंप के ऊपर लगातार पाकिस्तान के विपक्षी दल निशाना साध रहे हैं। शहबाज भले ही इस कदम को पाकिस्तान की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण कदम बता रहे हों लेकिन इस्लामाबाद में इसे लेकर राजनैतिक हालात ठीक नहीं है। विपक्षी दलों ने पाकिस्तान के इस चार्टर में शामिल होने के कदम को गैर-पारदर्शी और अस्पष्ट बताया है।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने कहा कि इतने अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर “पूर्ण पारदर्शिता और व्यापक परामर्श” जरूरी है। पार्टी ने इस पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह कराने की मांग भी की। फिलिस्तीनी जनता के समर्थन की बात करते हुए पीटीआई नेताओं ने कहा कि वे गाजा या पूरे फिलिस्तीन की जनता की इच्छा के खिलाफ किसी भी योजना को स्वीकार नहीं करेंगे।
आपको बता दें, ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से शहबाज सरकार न चाहते हुए भी इजरायल के साथ खड़ी दिखाई देती है। सबसे पहले इजरायल द्वारा ट्रंप को नोबेल के लिए नामित किया गया उसके बाद पाकिस्तान ने भी ऐसा ही किया।
ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस सार्वजनिक रूप से इजरायल के लिए फायदेमंद साबित होने वाला है। ऐसे में पाकिस्तान का इसमें शामिल होना, पाकिस्तानी सेना और सरकार के लिए गले की हड्डी बना हुआ है, लेकिन ट्रंप के इशारों पर चल रहे शहबाज के लिए इससे अलग होना आसान नहीं होगा।
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