
नई दिल्ली ।सोने (Gold) की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया और 4614.63 डॉलर प्रति औंस तक कारोबार करता नजर आया। इस तेजी ने निवेशकों (Investors) के बीच यह चर्चा बढ़ा दी है कि क्या सोने में 2025 जैसा मजबूत तेजी वाला माहौल दोबारा बन रहा है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियां पिछले साल से पूरी तरह समान नहीं हैं और आगे की दिशा कई आर्थिक संकेतकों (Economic Indicators) पर निर्भर करेगी।
सोने में ताजा तेजी के पीछे अमेरिका की वित्तीय स्थिति और सरकारी उधारी लागत को लेकर बढ़ी चिंता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की बायबैक बढ़ाने के फैसले ने बाजार में वित्तीय जोखिम को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। इस कदम के बाद अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में कमजोरी देखने को मिली।
कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी कीमत अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाती है। इसी वजह से डॉलर में गिरावट के बीच सोने की मांग बढ़ सकती है। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया, जिसने कीमती धातु को अतिरिक्त समर्थन दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के साथ चांदी में भी तेजी रही। स्पॉट चांदी करीब दो प्रतिशत बढ़कर 69.46 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची। दोनों कीमती धातुओं में मजबूती से संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी सुरक्षित परिसंपत्तियों में फिर बढ़ रही है।
2025 में सोने की तेज बढ़त के पीछे डिबेसमेंट ट्रेड एक महत्वपूर्ण थीम रही थी। इस रणनीति में निवेशक उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हैं, जिनमें बड़े कर्ज वाले देशों की कमजोर वित्तीय स्थिति, मुद्रास्फीति और मुद्रा की संभावित कमजोरी के कारण सोने जैसी परिसंपत्तियों की मांग बढ़ सकती है। पिछले साल इसी सोच ने सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन दिया था।
मौजूदा तेजी में भी कुछ निवेशक अमेरिकी कर्ज और डॉलर की दीर्घकालिक स्थिति को लेकर चिंताओं पर नजर रख रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन की ओर से उधारी लागत को नियंत्रित करने के प्रयासों ने बाजार में यह सवाल उठाया है कि इसका डॉलर और महंगाई पर आगे क्या असर होगा। अगर डॉलर में कमजोरी बनी रहती है तो सोने को इसका फायदा मिल सकता है।
हालांकि, सोना अभी अपने इस साल के रिकॉर्ड स्तर से नीचे है। मौजूदा भाव जनवरी के अंत में बने शिखर से करीब 100 डॉलर प्रति औंस कम बताए जा रहे हैं। इसलिए हाल की तेजी के बावजूद इसे सीधे नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ता बाजार मानना जल्दबाजी होगी।
सोने से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में भी निवेश का रुख बदलता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में लगातार निकासी के बाद ट्रैक किए गए फंड्स ने गुरुवार को करीब 18 टन सोना खरीदा। यह सितंबर 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी खरीदारी बताई गई है। लगातार पांचवें सप्ताह फंड निवेश बढ़ने की संभावना भी बाजार में सोने की मांग को लेकर सकारात्मक संकेत दे रही है।
फिर भी आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे माहौल में सोने की तेजी पर दबाव भी बन सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगाई और केंद्रीय बैंक की नीतियां आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे।
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