
Doctor with stethoscope in a hospital, back view
भोपाल। मप्र मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन को भेजी सिफारिश में कहा है कि धन के अभाव में किसी भी मरीज का इलाज न रुके। इसके लिए समुचित व्यवस्था की जाए। दरअसल, सोशल मीडिया पर 6 जून को तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें अस्पताल के पलंग पर रस्सी से बंधा मरीज नजर आ रहा था। इस मामले में आयोग ने संज्ञान लेते हुए राज्य शासन से कहा कि निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रहे सामाजिक-नैतिक मूल्यों के हनन के मामले में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करें। शाजापुर मामले में आयोग ने संज्ञान लेते हुए कहा कि मरीज की बेटी का आरोप था कि पैसे खर्च होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इलाज से इंकार कर दिया था। पिता को बांधकर रखा था ताकि वे भाग न जाएं। आयोग ने माना कि मरीज के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आयोग ने कहा कि मरीज का व्यवहार असामान्य हो गया था, तो भी उसे नींद की दवा देकर गॉज बेंडेज का उपयोग करते हुए बांधने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
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