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सरकार का SIM-Binding नियम लागू: अब पुराने तरीके से नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram, जानें पूरा बदलाव

March 04, 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 मार्च से मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स (Messaging platforms) के इस्तेमाल को लेकर बड़ा तकनीकी बदलाव लागू कर दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत लागू किए गए नए SIM-Binding नियम के बाद अब WhatsApp और Telegram केवल उसी फोन में सुचारु रूप से काम करेंगे, जिसमें वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद होगा, जिससे अकाउंट बनाया गया था।

सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर फ्रॉड और फर्जी सिम के जरिए होने वाली ठगी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, बड़ी संख्या में यूजर्स के लिए यह बदलाव असुविधा भी लेकर आया है।

क्या है नया SIM-Binding नियम?

नए नियम के मुताबिक:

मैसेजिंग ऐप अकाउंट अब संबंधित मोबाइल नंबर के एक्टिव सिम से लिंक (Bind) रहेगा।

यदि फोन में वह सिम कार्ड मौजूद नहीं है, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है।

ऐसी स्थिति में दोबारा री-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होगा।

पहले यूजर वेरिफिकेशन के बाद सिम निकालकर भी ऐप चला सकते थे और Web/Desktop पर लॉगिन बरकरार रहता था, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।

किन यूजर्स को होगी सबसे ज्यादा परेशानी?

नए नियम का सबसे ज्यादा असर इन पर पड़ेगा:

जो एक ही नंबर से दो फोन या टैबलेट पर ऐप इस्तेमाल करते थे।

जो नियमित रूप से WhatsApp Web या Telegram Web का उपयोग करते हैं।

जो अक्सर सिम कार्ड बदलते रहते हैं या दूसरी डिवाइस में लगाते हैं।

अब हर छह घंटे में Web और Desktop वर्जन ऑटोमेटिक लॉगआउट हो सकते हैं। दोबारा लॉगिन के लिए उसी फोन में वही मूल सिम डालना अनिवार्य होगा।

विदेश यात्रा करने वालों पर भी असर

यदि कोई यूजर विदेश जाकर लोकल सिम लगाता है, तो मूल नंबर से जुड़े अकाउंट का दोबारा सत्यापन करना पड़ सकता है।

केवल Wi-Fi आधारित टैबलेट या सेकेंडरी डिवाइस पर ऐप का उपयोग करना कठिन हो सकता है।



  • सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

    दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुसार, कई मामलों में धोखेबाज लोग बंद या फर्जी सिम से बने WhatsApp अकाउंट को सक्रिय रखकर ठगी और साइबर अपराध को अंजाम दे रहे थे।

    SIM-Binding सिस्टम से:

    फर्जी या निष्क्रिय सिम से जुड़े अकाउंट स्वतः निष्क्रिय हो जाएंगे।

    किसी भी नंबर का दुरुपयोग करना पहले से ज्यादा कठिन होगा।

    साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी।

    यूजर्स के लिए क्या संदेश?

    हालांकि यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में यूजर्स को अतिरिक्त सावधानी और बार-बार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

    टेक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यूजर्स को अपनी डिजिटल आदतों में बदलाव करना होगा, खासकर मल्टी-डिवाइस उपयोग करने वालों को।

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