
जोशीमठ । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे की हेराइेरी में दोषियों (Guilty of misappropriating offerings at Badrinath Dham) को बख्शा नहीं जाएगा (Will not be Spared) ।
श्री बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरिद्वार में स्पष्ट कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। हरिद्वार में मुरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले की जांच के लिए समिति का गठन किया जा चुका है। सरकार पहले ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर चुकी है और आगे भी जांच के आधार पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। दान-चढ़ावे में गड़बड़ी अत्यंत गंभीर मामला है। यह आस्था के साथ विश्वासघात है।
सीएम धामी ने इसे गौहत्या और अपने माता-पिता की हत्या के समान गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसा कृत्य किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है। एसआईटी सभी तथ्यों की गहनता से जांच कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित रूप से हेरफेर के मामले में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। बीकेटीसी चेयरमैन के कार्यालय में तैनात निजी सचिव प्रमोद नौटियाल पर भी मुकदमा दर्ज हुआ है। समिति के अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान ने बद्रीनाथ पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी। इसके आधार पर बुधवार को बद्रीनाथ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 306 और 316(5) के तहत यह मुकदमा लिखा। शिकायत के अनुसार, 2 जुलाई को सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ मंदिर में दान के पैसे के प्रबंधन में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद मंदिर समिति ने तीन सदस्यों की एक जांच समिति बनाई थी। शुरुआती जांच में कथित तौर पर ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि प्रमोद नौटियाल ने बिना इजाजत सुबह 9 बजे से 9.30 बजे के बीच मंदिर का फंड निकाला था।
शुरुआती जांच में खुलासों के बाद समिति ने 7 जुलाई को नौटियाल को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। समिति का कहना था कि उन्हें पद पर बनाए रखने से जांच की निष्पक्षता और ईमानदारी पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज हो गई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने का मतलब आरोपों की पुष्टि होना नहीं है। दोषी या निर्दोष होने का फैसला पुलिस जांच और उसके बाद की न्यायिक कार्यवाही के नतीजों पर निर्भर करेगा। इसी बीच, बद्रीनाथ मंदिर में दान की चोरी के आरोपों पर समिति की शुरुआती प्रतिक्रिया से संतुष्ट न होकर उत्तराखंड सरकार ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बीकेटीसी चेयरमैन के कार्यालय में तैनात निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
उधर, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। वहीं, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।
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