
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले में बंदूक लेकर सरकारी निर्माण कार्य का निरीक्षण करने वाले जनपद पंचायत मझगवां के सब इंजीनियर (उपयंत्री) सतीश समेले पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हो गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और मामला सुर्खियों में आने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। हालांकि, सस्पेंड होते ही उपयंत्री ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कमीशनखोरी का बड़ा दावा कर दिया, जिससे मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें जनपद पंचायत मझगवां में पदस्थ सब इंजीनियर सतीश समेले हाथ में बंदूक लेकर सड़क पुलिया निर्माण कार्य का निरीक्षण करते दिखाई दिए थे। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने इसे सरकारी सेवा की मर्यादा और शस्त्र अधिनियम के नियमों के विपरीत मानते हुए गंभीर मामला माना। इसके बाद उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया। साथ ही कलेक्टर को भी पत्र लिखकर शस्त्र लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन की जानकारी दी गई, जिसके आधार पर अलग से नोटिस जारी किया गया।
सीईओ के अनुसार, बंदूक लेकर निरीक्षण करने के अलावा उपयंत्री के खिलाफ कर्मचारियों से दुर्व्यवहार, सरपंचों और सचिवों के साथ अभद्र व्यवहार, काम में लापरवाही और प्रताड़ना जैसी कई शिकायतें पहले से दर्ज थीं। दोनों नोटिसों पर मिले जवाब का परीक्षण किया गया, लेकिन प्रशासन को उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद उपयंत्री सतीश समेले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जांच प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के कार्यपालन यंत्री कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।
कार्रवाई के बाद उपयंत्री सतीश समेले ने मीडिया के सामने विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विभाग में निर्माण कार्यों के बदले ऊपर से नीचे तक कमीशन का तय सिस्टम चलता है और बिना कमीशन दिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। समेले ने वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई निराधार है। उन्होंने विभाग के भीतर कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का खुलासा करने का दावा किया।
उपयंत्री के निलंबन के बाद मामला केवल बंदूक लेकर निरीक्षण करने तक सीमित नहीं रह गया है। अब विभाग के भीतर कथित कमीशनखोरी के लगाए गए आरोपों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों की जांच कराता है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई होती है।
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