
नई दिल्ली।हरियाणा (Haryana) में करीब 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। (IDFC First Bank )की चंडीगढ़ (Chandigarh) शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) से जुड़े खातों में अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Chief Minister Nayab Singh Saini) ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि एक-एक पैसा वापस लाया जाएगा और इस घोटाले में शामिल किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।
मामला तब उजागर हुआ जब एक सरकारी विभाग ने अपना खाता बंद कर धनराशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान खाते में दर्ज राशि और वास्तविक बैलेंस के बीच अंतर सामने आया। शुरुआती जांच में पता चला कि केवल एक खाते में ही नहीं बल्कि उसी शाखा से जुड़े अन्य सरकारी खातों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां मौजूद हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार घोटाले की रकम लगभग 590 करोड़ रुपये बताई जा रही है हालांकि अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बैंक ने अपनी नियामकीय जानकारी में स्वीकार किया कि प्रथम दृष्टया कुछ कर्मचारियों द्वारा अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की गईं जिनमें बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं की संलिप्तता भी हो सकती है। हालांकि बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह मामला कुछ विशेष सरकारी खातों तक सीमित है और अन्य ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
23 फरवरी को यह मुद्दा हरियाणा विधानसभा में भी जोरदार तरीके से उठा। विपक्ष के नेता Bhupinder Singh Hooda ने सरकार से पूछा कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है और जिम्मेदार लोगों पर कब तक शिकंजा कसा जाएगा। जवाब में मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस विभाग को जांच सौंप दी गई है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने सदन में कहा कि चाहे बैंक का कर्मचारी हो या कोई सरकारी अधिकारी दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गड़बड़ी का पता चलते ही सरकार ने संबंधित धनराशि को सुरक्षित करने और अन्य बैंक में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी ताकि आगे किसी तरह का जोखिम न रहे। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम करती है और इस मामले को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जाएगा।
दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा है कि केंद्रीय बैंक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल इसे किसी प्रणालीगत समस्या के रूप में नहीं देखा जा रहा। बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ V. Vaidyanathan ने भी स्वीकार किया कि कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत से यह धोखाधड़ी हुई और यह किसी व्यापक रिपोर्टिंग त्रुटि का मामला नहीं है बल्कि एक सीमित इकाई और ग्राहक समूह तक केंद्रित है।
इस खुलासे के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला और बैंक का शेयर करीब 20 प्रतिशत तक गिर गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और बैंकिंग नियंत्रण तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सरकार और जांच एजेंसियां सख्त कार्रवाई के संकेत दे रही हैं और प्रदेश की नजर अब इस बात पर है कि 590 करोड़ रुपये की वसूली और दोषियों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है।
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