
नई दिल्ली: तेलंगाना (Telangana) से पशु क्रूरता (Animal Cruelty) की एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। राज्य के मनचेरियल जिले (Mancherial District) के एक गांव में कथित तौर पर करीब 100 आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को जहर देकर मार दिया गया और बाद में उनके शवों को पास की नदी के किनारे दफना दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों (Animal Welfare Groups) में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
स्थानीय पुलिस के अनुसार इस घटना का खुलासा तब हुआ जब एक पशु कल्याण कार्यकर्ता ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक ए गौतम नाम के पशु कल्याण कार्यकर्ता ने पुलिस थाने में पहुंचकर इस बर्बर घटना के बारे में बताया। ए गौतम स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़े हुए हैं और वहां क्रूरता निवारण प्रबंधक के रूप में कार्य करते हैं।
उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव की जानकारी में दो लोगों ने मिलकर इन कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन देकर मार डाला। इसके बाद कुत्तों के शवों को गांव के पास स्थित नदी के किनारे दफना दिया गया ताकि घटना का पता न चल सके।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में पहले भी बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों को मारने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी और पिछले साल दिसंबर के दौरान तेलंगाना के अलग अलग जिलों में करीब 1300 आवारा कुत्तों को मार डाले जाने के मामले सामने आए थे। इन मामलों में भी पशु कल्याण कार्यकर्ताओं की शिकायत पर कई सरपंचों ग्राम पंचायत सचिवों और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे।
माना जा रहा है कि पिछले साल दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनाव से पहले गांवों में आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने के वादे के चलते कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस तरह के कदम उठाए हो सकते हैं। हालांकि इस मामले में अभी जांच जारी है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रही है।
दरअसल पिछले कुछ समय से देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर बहस तेज हो गई है। समाज में इस मुद्दे पर दो अलग अलग राय देखने को मिलती हैं। एक वर्ग ऐसा है जो आवारा कुत्तों को समाज का हिस्सा मानते हुए उनके संरक्षण और देखभाल की वकालत करता है। वहीं दूसरा वर्ग इन्हें सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा मानता है।
इसी मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली में भी मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने एक समय इन कुत्तों को हटाने का आदेश भी दिया था लेकिन बाद में विरोध और प्रदर्शन के बाद इस आदेश पर रोक लगा दी गई थी।
तेलंगाना की यह घटना एक बार फिर इस बहस को तेज कर सकती है कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए मानवीय और कानूनी तरीके क्या होने चाहिए ताकि पशु क्रूरता जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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