
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संभल जिले (Sambhal district) में रमजान (Ramadan) के दौरान नमाज (prayer) अदा करने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कड़ी नाराजगी जताई है।अदालत ने इस आदेश को खारिज करते हुए जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि जिले के पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) और जिलाधिकारी (District Magistrate) को लगता है कि वे कानून का शासन (rule of law) लागू करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा (resignation) दे देना चाहिए या फिर स्थानांतरण (transfer) की मांग कर लेनी चाहिए।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान की। अदालत मुनाजिर खान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में गाटा संख्या 291 स्थित एक स्थल को मस्जिद बताते हुए वहां नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उस स्थल पर नमाज पढ़ने वालों की संख्या अधिकतम 20 लोगों तक सीमित कर दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह आदेश धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है और लोगों को अपने धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्वक इबादत करने से रोका जा रहा है।
दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार कुछ निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज है। प्रशासन का तर्क था कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से ही नमाजियों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया गया था ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न हो।
हालांकि अदालत ने प्रशासन की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि राज्य का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य कानून का शासन स्थापित करना है। यदि किसी समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा या नमाज अदा करनी है तो उसे ऐसा करने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसके लिए धार्मिक गतिविधियों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित स्थल की तस्वीरें और उससे जुड़े राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय दिया। कोर्ट ने कहा कि इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे विस्तृत सुनवाई की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे ताजा मामलों की सूची में शीर्ष दस मामलों में शामिल करने का निर्देश भी दिया है ताकि इस पर जल्द सुनवाई हो सके। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 मार्च तय की है।
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। अदालत के इस फैसले को धार्मिक अधिकारों और कानून के शासन को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। अब अगली सुनवाई में अदालत के सामने पेश होने वाले दस्तावेजों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी।
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