तेहरान। ईरान और अमेरिका-इजरायल (Iran and the US-Israel) के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे संवेदनशील और क्रिटिकल समुद्री रास्तों (Critical Sea Routes) में से एक बन गया है। 9 अप्रैल को सीजफायर लागू होने के बावजूद, इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही अब भी काफी हद तक बंद है। ओमान और ईरान के बीच मौजूद इस संकरे मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है। ऊर्जा बाजारों में मची इस उथल-पुथल और भारी संकट के बीच, भारत अपने जहाजों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए एक खास ‘सीक्रेट’ रणनीति पर काम कर रहा है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने एक हालिया ब्रीफिंग में बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में फिलहाल 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं। इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं। भारत सरकार की प्राथमिकता इन सभी जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।
क्या है सरकार की सीक्रेट रणनीति?
जब मंत्रालय के अधिकारी से पूछा गया कि भारत सरकार ईरान के साथ किस तरह तालमेल बिठा रही है, तो उन्होंने स्पष्ट कारणों से इसकी पूरी प्रक्रिया बताने से इनकार कर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि भारत किसी सीक्रेट प्लान के तहत अपने जहाजों को निकाल रहा है। ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि पूरा समन्वय विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए हो रहा है। कौन सा जहाज पहले निकलेगा, इसकी प्राथमिकता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MOPNG) और उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर तय की जा रही है। इसी के आधार पर जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है।
सरकार के इस समन्वित प्रयास का असर भी दिखने लगा है। ताजा अपडेट्स के मुताबिक, 25-26 मई की रात करीब 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा ‘निसोस केरोस’ नामक क्रूड ऑयल टैंकर सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर गया। इसके 3 जून 2026 तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि 14 जहाज होर्मुज को सुरक्षित पार करके भारत पहुंच चुके हैं, जबकि 11 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं।
पब्लिक शिप ट्रैकिंग डेटा पर क्या बोली सरकार?
पब्लिक डोमेन में मौजूद शिप ट्रैकिंग डेटा से जहाजों की सुरक्षा को होने वाले खतरे के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि ये कमर्शियल ऐप्स हैं, जिनका कोई भी सब्सक्रिप्शन ले सकता है। सार्वजनिक रूप से मौजूद डेटा का इस्तेमाल कैसे होगा, यह इस्तेमाल करने वाले की नीयत पर निर्भर करता है। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह डेटा सरकार को जहाजों को ट्रैक करने में मदद ही कर रहा है।
खतरे के बीच लगातार जारी है भारत का समुद्री व्यापार
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। ईरान की भौगोलिक स्थिति इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसे एक बड़ी सामरिक बढ़त देती है। इसी डर से दुनिया की कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। इसके बावजूद भारत ने इस रूट से अपना समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जारी रखी है। खतरे के बावजूद ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’, ‘जग लाडकी’, ‘पाइन गैस’, ‘जग वसंत’, ‘बीडब्ल्यू टायर’ और ‘ग्रीन सान्वी’ जैसे कई भारतीय जहाजों ने इस तनावपूर्ण जलमार्ग को पार किया है।
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