नई दिल्ली । रूस ने कहा है कि भारत-चीन के सीमा विवाद में मध्यस्थता करने का उसका कोई इरादा नहीं है, ऐसा तभी संभव है जब दोनों देश इसके लिए राजी हों।
भारत में रूसी दूतावास के उपप्रमुख रोमन बाबुसकिन ने कहा कि उनके देश की यह मान्यता है कि वह किसी दूसरे देश के मामलों में दखलअंदाजी न करे। मध्यस्थता का सवाल तभी पैदा होता है कि जब दोनों पक्षों की ओर से ऐसा करने का अनुरोध किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत-चीन को यह तय करना है कि वह किसी रूसी मध्यस्थता के लिए तैयार हैं या नहीं।
रूसी राजनयिक ने कहा कि उनके देश का ध्यान अभी इस ओर है कि भारत और चीन के विवाद को सुलझाने के लिए सकारात्मक माहौल बने।
उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के देशों की बैठक में भाग ले रहे हैं। वह इस दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ पूर्वी लद्दाख की स्थिति के साथ ही द्विपक्षीय मामलों पर विचार-विमर्श करेंगे।
इसके पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मॉस्को में आयोजित एससीओ के रक्षामंत्रियों की बैठक में भाग लिया था तथा बैठक से अलग चीन के रक्षामंत्री से वार्ता की थी।
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