
नई दिल्ली. भारत (India) और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) को लेकर वार्ता अब तेज मोड़ पर पहुंच गई है। इसी क्रम में यूरोपीय संघ का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैठक का मकसद साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति की समीक्षा करना है।
ईयू टीम का नेतृत्व सबाइन वेयेंड, डायरेक्टर जनरल, ट्रेड विभाग कर रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं से जुड़े उन मुद्दों को सुलझाना है, जिन पर अभी भी दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं।
इन मुद्दों पर अटका है FTA
अधिकारी के मुताबिक, भारत-ईयू एफटीए वार्ता में अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें स्टील सेक्टर, कार्बन टैक्स, ऑटोमोबाइल, और नॉन-टैरिफ बैरियर्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ईयू की ओर से विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, वाइन, स्पिरिट, मांस और पोल्ट्री जैसे उत्पादों पर बड़ी ड्यूटी कटौती की मांग की जा रही है। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ एक मजबूत बौद्धिक संपदा अधिकार ढांचा स्थापित करने पर भी जोर दे रहा है, जो उनकी प्राथमिकताओं की सूची में प्रमुख है।
भारत–EU व्यापार संबंध
भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
भारत का ईयू को निर्यात: 75.85 अरब डॉलर
भारत का आयात: 60.68 अरब डॉलर
ईयू बाजार भारत के कुल निर्यात का 17% हिस्सा है, जबकि ईयू की भारत को निर्यात हिस्सेदारी 9% है।
FTA से भारत को क्या फायदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि समझौता लागू होने के बाद भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधा लाभ मिल सकता है। रेडीमेड गारमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे सेक्टर यूरोपीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा को और मजबूत कर पाएंगे। इन उत्पादों की पहुंच बढ़ने के साथ भारत का निर्यात भी गति पकड़ सकता है।
2013 में रुकी थीं वार्ताएं
भारत और 27 देशों वाले EU ब्लॉक ने जून 2022 में FTA वार्ता दोबारा शुरू की थी। इससे पहले 2013 में मार्केट एक्सेस को लेकर मतभेदों के चलते बातचीत रुक गई थी। इस बार वार्ता 23 नीति क्षेत्रों को कवर कर रही है, जिनमें व्यापार, सेवाएं, निवेश, कस्टम और व्यापार सुगमता, सरकारी खरीद, विवाद समाधान, IPR और भौगोलिक संकेतक (GI) शामिल हैं। दोनों पक्ष साल के अंत तक बातचीत समाप्त करने के लिए उत्सुक हैं।
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