वॉशिंगटन। अमेरिका ने एक बार फिर भारत को बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े मुद्दों पर अपनी ‘प्रायोरिटी वॉच लिस्ट’ में बनाए रखा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की 2026 की ‘स्पेशल 301 रिपोर्ट’ में भारत के साथ चीन, रूस, इंडोनेशिया, चिली और वेनेजुएला (China, Russia, Indonesia, Chile and Venezuela) जैसे देशों को भी शामिल किया गया है।
हर साल जारी होने वाली इस रिपोर्ट में अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदार देशों के पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क सुरक्षा के स्तर की समीक्षा करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में IPR सुरक्षा और उसका लागू होना अभी भी “चुनौतीपूर्ण” है। प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:
1. पेटेंट कानून और धारा 3(d)
भारत का पेटेंट कानून, खासकर धारा 3(d), मामूली बदलाव के आधार पर नए पेटेंट देने से रोकता है।
2. डेटा सुरक्षा पर सवाल
अमेरिका को चिंता है कि फार्मा और कृषि रसायनों से जुड़े गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए भारत में पर्याप्त तंत्र नहीं है।
3. भारी कस्टम ड्यूटी
रिपोर्ट में भारत द्वारा लगाए गए उच्च आयात शुल्क की आलोचना की गई है, खासकर:
4. कॉपीराइट और नकली उत्पाद
कॉपीराइट लागू करने में ढिलाई और बड़े पैमाने पर काउंटरफिट (नकली) सामान की मौजूदगी भी अमेरिका की चिंता बनी हुई है।
अमेरिका की मुख्य चिंता उसकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों, खासकर दवा कंपनियों के मुनाफे और पेटेंट अधिकार से जुड़ी है।
भारत का इस सूची में बने रहना नया नहीं है—1990 के दशक से ही यह स्थिति बनी हुई है। असल में यह कानून बनाम व्यापारिक हित की बहस है, जहां
आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में अहम भूमिका निभाता रहेगा।
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