मॉस्को/कीव। रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच जारी युद्ध के बीच सोमवार को रूस ने यूक्रेन (Ukraine) के कई इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोन से व्यापक हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई क्षेत्रों में ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमलों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की अपील की।
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, एक रूसी मिसाइल ने ड्निप्रो शहर में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और 29 अन्य घायल हुए।
इसके अलावा दक्षिणी क्षेत्र में ड्रोन हमले के दौरान एक यात्री मिनी बस भी चपेट में आ गई। इस घटना में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक बच्चे सहित छह लोग घायल हो गए।
लगातार हवाई हमलों के कारण ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। स्थानीय प्रशासन राहत और मरम्मत कार्य में जुटा है, जबकि प्रभावित इलाकों में आपातकालीन सेवाएं सक्रिय कर दी गई हैं।
हमलों के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों से आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति और उनके विकास में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम की तत्काल आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रूस द्वारा फरवरी 2022 में पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद से अब तक 16,000 से अधिक यूक्रेनी नागरिकों की मौत हो चुकी है। संगठन ने लगातार नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच ड्रोन युद्ध काफी तेज हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूस और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में ईंधन और सैन्य आपूर्ति से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे रूसी लॉजिस्टिक्स पर दबाव बढ़ा है।
हालांकि, रूस ने ताजा हमलों के पीछे किसी विशेष कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्ष अब पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ड्रोन और लंबी दूरी के सटीक हथियारों पर पहले से अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, जिससे युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है।
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