
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में भारत (India) ने पाकिस्तान (Pakistan) को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि वह सीमा पार आतंकवाद (Terrorism) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के बयान का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा।
‘आतंकवाद के परिणाम भुगतने होंगे’
पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना चाहिए, क्योंकि इसके गंभीर परिणाम सामने आते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
कश्मीर मुद्दे पर भारत का सख्त रुख
बैठक में पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया, जिस पर भारत ने कड़ा जवाब दिया। भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जो पूर्ण, वैध और अंतिम रूप से भारत में शामिल हो चुका है। भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने कई बार युद्ध छेड़कर और आतंकवाद को समर्थन देकर क्षेत्रीय शांति भंग की है।
संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का हवाला
भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव में पाकिस्तान से कश्मीर से अपने सैनिकों को वापस बुलाने को कहा गया था, लेकिन पाकिस्तान ने इसका पालन नहीं किया। भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का रवैया लगातार अस्थिरता और गलत प्रचार पर आधारित रहा है।
यूएन में फिर टकराव
इस बहस के दौरान दोनों देशों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक टकराव देखने को मिला। भारत ने जहां आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बताया, वहीं पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया। भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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