
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली में छात्रों के जारी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय संवाद हमेशा बेहतर रास्ता होता है। अपने पत्र में हजारे ने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि इससे अन्य मंत्रियों को जवाबदेही का स्पष्ट संदेश जाएगा और सरकार का कामकाज अधिक प्रभावी बनेगा।
यह पत्र ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कांग्रेस समेत विपक्षी दल नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अन्ना हजारे ने सरकार को दी क्या सलाह?
हजारे ने पत्र में लिखा, “अगर जवाबदेही तय की जाती है और किसी मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है, तो इससे सरकार की शक्ति कम नहीं होगी। बल्कि इससे अन्य मंत्रियों को स्पष्ट संदेश जाएगा कि अगर वे अपने विभाग की जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाएंगे तो उन्हें भी पद छोड़ना पड़ेगा। इससे सरकार का कामकाज अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगा।”
उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में जारी आंदोलन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद दुखद हैं। लोकतंत्र में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और अत्यधिक बल प्रयोग से हर हाल में बचना चाहिए। गांधीवादी अन्ना हजारे ने कहा कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर देशभर के लाखों युवा चिंतित हैं। इन चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानने के बजाय जनता की पीड़ा के रूप में देखा जाना चाहिए।
नीट पेपर लीक पर क्या बोले हजारे?
नीट परीक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में प्रश्नपत्र लीक और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इस वर्ष भी, जब करीब 22 लाख छात्रों ने परीक्षा दी, तब इसी तरह की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कथित अनियमितताओं और पुनर्परीक्षा के परिणामों से निराश होकर 22 छात्रों ने आत्महत्या कर ली।
हजारे ने कहा कि जब भी कोई घोटाला या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी अक्सर निचले स्तर के अधिकारियों पर तय कर दी जाती है, जबकि सकारात्मक परिणामों का श्रेय सरकार लेती है। उन्होंने कहा कि अंतिम जिम्मेदारी शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की होती है। उन्होंने लिखा कि छात्र और अभिभावक पिछले 25 दिनों से संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार को इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय जवाबदेही के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
सोनम वांगचुक को लेकर क्या बोले अन्ना हजारे?
हजारे ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी सार्थक संवाद के उनके अनशन स्थल से जबरन हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक आंदोलन चलने के बावजूद सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि या सचिव स्तर के अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में टकराव की तुलना में संवाद हमेशा बेहतर होता है।” साथ ही प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि जनता की आवाज को राजनीतिक विरोधियों की आवाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हजारे ने कहा कि सरकार को धैर्यपूर्वक प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए, विश्वास कायम करना चाहिए और गांधीवादी सिद्धांतों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप रचनात्मक संवाद के माध्यम से मतभेदों का समाधान करना चाहिए। सीजेपी का आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था। इसकी मांगों में परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है।
कैसे शुरू हुआ सीजेपी का आंदलोन?
सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन से जुड़े थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां से भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा है। वांगचुक ने कहा है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती या राजनीतिक नेता उन्हें यह भरोसा नहीं देते कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
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