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भारत-यूके एफटीए आर्थिक नजरिए से बेहद अहम होगा

July 15, 2026


नई दिल्ली । भारत-यूके एफटीए (India-UK FTA) आर्थिक नजरिए से बेहद अहम होगा (Will be extremely important from an Economic Perspective) । इसके तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।


  • यह समझौता दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने, औद्योगिक इनोवेशन को तेज करने और पेशेवर स्तर पर आवाजाही को बढ़ाने के लिए एक नियामक ढांचे के तौर पर काम करेगा। इस एफटीए के साथ ही भारतीय निर्यातकों को यूके का बड़ा बाजार मिल गया है, जिसे दुनिया के सबसे प्रीमियम कंज्यूमर मार्केट्स में गिना जाता है। इस समझौते के चलते भारत के 99 प्रतिशत सामान को यूके में जीरो-ड्यूटी के साथ एंट्री मिलेगी, जिससे असल में देश के यूके के साथ कुल व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा ड्यूटी-फ्री हो जाता है।

    इससे समझौते के फायदे अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं। एफटीए से पहले भारत से यूके को निर्यात किए जाने वाले प्रोसेस्ड फूड पर 70 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती थी, जो अब घटकर शून्य हो गई है। सब्जियों पर ड्यूटी पहले के 20 प्रतिशत तक से घटकर शून्य हो गई है। ट्रांसपोर्ट/ऑटो पर ड्यूटी पहले के 18 प्रतिशत तक से घटकर शून्य और कपड़ा पर ड्यूटी पहले के 12 प्रतिशत तक से घटक शून्य हो गई है। इसके अलावा केमिकल, आभूषण, प्लास्टिक एवं रबर और घड़ियों आदि पर ड्यूटी भी शून्य हो गई है।

    सामान के अलावा इस एफटीए से पेशेवरों को बड़ी संख्या फायदा होगा। इस एफटीए के तहत यूके ने भारतीय कर्मचारियों के लिए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) की छूट को तीन साल से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। इससे यूके में अस्थायी रूप से काम करने गए लोगों के लिए डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे भारत के आईटी, इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग और हेल्थकेयर क्षेत्र में काम करने वाले 75,000 से अधिक पेशेवरों और 900 के करीब कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है।

    इस समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, फल, सब्जियों और खाद्यान्न को बाहर रखा है। इस ट्रेड एग्रीमेंट के तहत, स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे कई ब्रिटिश प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैरिफ अब कम होने लगेंगे। हालांकि, कई प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी में कटौती आने वाले सालों में धीरे-धीरे लागू की जाएगी। यह अहम व्यापार समझौता 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई, 2025 को साइन किया गया था। इसमें 30 चैप्टर हैं, जिनमें सामान और सर्विस का व्यापार, डिजिटल व्यापार, फाइनेंशियल सर्विस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और सरकारी खरीद जैसे विषय शामिल हैं ।

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