बर्न (Burn)। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) को शुरू हुए लगभग ढाई साल हो चुके हैं। इस युद्ध में दोनों ही पक्षों के लाखों लोग मारे जा चुके हैं। यूक्रेन अपने प्रतिद्वंदी से कमजोर (Ukraine weaker than its rival) होने के बावजूद पश्चिमी देशों के दम पर रूस को लगातार चुनौती दे रहा है। हालांकि, इसके लिए उसे भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। इस युद्ध का पूरी दुनिया पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
ऐसे में रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए स्विट्जरलैंड में शांति सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रूस-यूक्रेन संकट को समाप्त करना और क्षेत्र में शांति लाना है। ऐसे में दोनों देश किसी ऐसे मध्यस्थ की तलाश में है, जिस पर वे भरोसा कर सकें। वर्तमान में भारत को छोड़कर दुनिया की सभी महाशक्तियां किसी न किसी पक्ष का खुला समर्थन कर रही हैं। ऐसे में भारत के सामने इस युद्ध में शांतिदूत बनने का मौका है।
4 जून को संसदीय चुनावों के परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में एक और कार्यकाल मिलने की संभावना है। उस स्थिति में, उनके स्विस शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। वह जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं जो एक दिन पहले इटली में समाप्त हो रहा है। हो सकता है कि उसके बाद स्विस शिखर सम्मेलन में भाग लेना उनके लिए सुविधाजनक हो।
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